सुकमा , जुलाई 18 -- छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में चार दशक से बंद पड़ी कोयाबेकुर व्यपवर्तन योजना का पुनर्जीवन होने के बाद अब क्षेत्र के 100 से अधिक किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचने लगा है। इससे 160 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी और किसानों को धान के साथ नकदी फसलों की खेती का भी अवसर मिलेगा।
जिला प्रशासन से आज मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार वर्ष 1983 में शुरू की गई इस परियोजना का संचालन रखरखाव के अभाव और नक्सल प्रभावित परिस्थितियों के कारण लंबे समय तक बाधित रहा। इसके चलते किसान वर्षा आधारित खेती अथवा महंगे बोरवेल पर निर्भर रहने को विवश थे।
सिंचाई विभाग के कार्यपालन अभियंता शांतनु विश्वास ने बताया कि वर्ष 2023 में परियोजना के लिए 187.22 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद वर्ष 2024 से नहर के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू किया गया। 2.74 किलोमीटर लंबी नहर की सीसी लाइनिंग तथा आवश्यक संरचनाओं का निर्माण किया गया। जून 2026 में नहर के अंतिम छोर तक पानी पहुंच गया।
कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में वर्षों से लंबित इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा किया गया है। इससे 100 से अधिक किसानों को नियमित सिंचाई सुविधा मिलेगी तथा 160 हेक्टेयर क्षेत्र में कृषि उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि अधिक किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए नहर विस्तार की कार्ययोजना पर भी काम किया जा रहा है।
किसान संपत यादव ने बताया कि नहर बनने के कुछ समय बाद ही इसका संचालन बंद हो गया था, लेकिन अब इसके पुनर्जीवित होने से गर्मी के मौसम में भी खेती संभव हो सकेगी, जिससे लागत घटेगी और आय बढ़ेगी।
किसान मुकेश सोड़ी ने कहा कि वर्षों बाद नहर में पानी आने से क्षेत्र के किसानों में उत्साह है। खेतों तक सिंचाई सुविधा पहुंचने से उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा।
नहर में पानी पहुंचने के बाद किसानों और ग्रामीणों ने राज्य सरकार तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्र की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
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