पटना , अगस्त 23 -- जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रवक्ताओं नीरज कुमार और पूजा पैट्रिक ने रविवार को कहा कि चारा घोटाले में जेल जाने के डर से लालू प्रसाद ने फरक्का समझौते के दौरान बिहार के हितों की बलि चढ़ा दी।
जदयू के प्रवक्ताओं श्री कुमार और श्रीमती पैट्रिक ने आज संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव पारिवारिक हितों के पक्षधर हैं और चारा घोटाले से बचने के लिए उन्होंने फरक्का जल समझौते के दौरान बिहार के हितों की बलि चढ़ा दी।
जदयू ने श्री यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि 12 दिसंबर 1996 को हुई इस संधि के दौरान वह केंद्र की संयुक्त मोर्चा सरकार में प्रभावशाली भूमिका में थे और उस समय बिहार के मुख्यमंत्री भी थे। उन्होंने कहा कि उस समय की सरकार में तत्कालीन विदेश मंत्री आई के गुजराल से भी उनके अच्छे संबंध थे। बावजूद इसके भारत और बांग्लादेश के बीच हुई इस जल संधि के विरोध में उन्होंने कोई आवाज नहीं उठाई ।
जदयू प्रवक्ताओं ने लालू प्रसाद यादव से सवाल पूछते हुए कहा कि यह संधि 12 दिसंबर 1996 को हुई थी, लेकिन इसके पहले ही वह चारा घोटाले में अभियुक्त करार दिए गए थे। उन्होंने कहा कि जेल जाने के डर से उन्होंने बिहार के हितों की बलि चढ़ाने का काम किया।
प्रवक्ताओं ने कहा कि तब नीतीश कुमार ने इस संधि का विरोध किया और पुरजोर तरीके से गंगा नदी में गाद के मसले को उठाया था।
जदयू ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री श्री कुमार हमेशा जल प्रबंधन एवं उससे जुड़ी समस्याओं को मजबूती से उठाते रहे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि फरक्का बराज पर नए सिरे से विचार होना चाहिए।
प्रवक्ताओं ने कहा कि जिस वीडियो का जिक्र कर लालू प्रसाद यह दावा कर रहे है कि उन्होंने गंगा जल संधि पर कड़ा विरोध किया था, दरअसल वह वीडियो 19 दिसंबर 2011 का है, जब वह केंद्र की यूपीए सरकार से बाहर थे।
जदयू ने कहा कि यह साफ दर्शाता है कि लालू प्रसाद जब सत्ता में थे, उस दौरान उन्होंने बिहार के हित से समझौता होने दिया और जब सत्ता से बाहर हो गए तब इस संधि का विरोध करने लगे।
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