कुशीनगर , जुलाई 31 -- कुशीनगर जिले में बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी (एसओसी) पडरौना के न्यायालय की त्रिस्तरीय औचक जांच में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताएं सामने आई हैं।

जिलाधिकारी के आदेश पर 30 जुलाई को अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वैभव मिश्रा, उप जिलाधिकारी (न्यायिक) पडरौना डॉ. संतराज तथा उप जिलाधिकारी (न्यायिक) हाटा विवेकशील यादव की संयुक्त टीम ने न्यायालय का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली में आदेश के लिए सुरक्षित दर्शाई गई 50 पत्रावलियों के सापेक्ष पेशकार केवल 14 पत्रावलियां ही प्रस्तुत कर सका। इसके बाद जांच टीम ने पीठासीन अधिकारी संतोष कुमार के सरकारी आवास से 26 अतिरिक्त पत्रावलियां बरामद कर उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत कराया।

अपर जिलाधिकारी ने बताया कि बरामद पत्रावलियों में 15 ऐसे मामले पाए गए, जिनका ऑनलाइन पोर्टल पर कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं था। जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में महीनों पहले बहस पूरी हो जाने के बावजूद आदेश पारित नहीं किए गए थे। इसके अलावा आदेश फर्दकाम निर्धारित बारकोड युक्त प्रारूप के बजाय सादे कागजों पर दर्ज पाए गए, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभिलेख प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पीठासीन अधिकारी द्वारा पत्रावलियों का समय पर निस्तारण न कर उन्हें अपने सरकारी आवास पर रखकर अनावश्यक रूप से लंबित रखा गया, जिससे अनुचित लाभ की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। समिति ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपते हुए संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की संस्तुति की है।

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