मुरैना , अप्रैल 23 -- मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में चंबल नदी स्थित राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र में रेत के अवैध उत्खनन पर प्रतिबंध के प्रशासनिक दावों के बावजूद रेत मंडियों का संचालन बदस्तूर जारी है, जिससे कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार अवैध खनन रोकने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) की एक कंपनी को चंबल राजघाट क्षेत्र में तैनात किया है तथा ड्रोन कैमरों से चौबीस घंटे निगरानी की जा रही है। इसके अलावा रेत माफियाओं के ट्रैक्टर-ट्रॉली नदी तक न पहुंच सकें, इसके लिए रास्तों में जेसीबी से गहरे गड्ढे भी खुदवाए गए हैं। इसके बावजूद बड़े पैमाने पर रेत की मंडियां संचालित होना प्रशासन के दावों पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार हाल ही में अवैध रेत से भरी करीब आधा दर्जन ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पकड़ी गई हैं। वहीं प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि शहर में तड़के बड़ी संख्या में रेत से भरे वाहन खुलेआम दौड़ते नजर आते हैं, जिससे अवैध परिवहन जारी रहने के संकेत मिलते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनियों के बावजूद अवैध खनन जारी रहने के पीछे संगठित माफिया, स्थानीय स्तर पर मिलीभगत, दुर्गम बीहड़ क्षेत्र और रेत की भारी मांग प्रमुख कारण हैं। बताया गया है कि माफिया आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए रात के समय खनन कर रहे हैं और निगरानी से बचने के तरीके अपनाते हैं।
प्रशासन द्वारा राजघाट और सिकरौदा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस और एसएएफ के जवानों की तैनाती कर 24 घंटे गश्त और निगरानी का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इससे अलग नजर आ रही है।
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