मुरैना , अक्टूबर 27 -- मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में चंबल नदी में अवैध रेत उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर रोक लगाने के लिए मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश के अधिकारी संयुक्त रूप से कार्रवाई करेंगे। सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) के सदस्य सुनील लिमाये ने मंगलवार को देवरी में आयोजित अंतरराज्यीय समन्वय बैठक में तीनों राज्यों के पुलिस, वन, खनिज, परिवहन और राजस्व विभागों को आपसी तालमेल से प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

श्री लिमाये ने निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के लिए मुरैना वन मंडल में 16 वन चौकियां स्थापित करने, चंबल नदी क्षेत्र में कैमरों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित टावरों से निगरानी करने तथा नियमित संयुक्त जांच करने पर जोर दिया। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा चंबल नदी के पुल पर आगामी 15 दिनों में पीटीजेड कैमरे लगाए जाएंगे। कंट्रोल रूम के माध्यम से भी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई और अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन में संलिप्त वाहनों को नियमानुसार राजसात करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में तय किया गया कि तहसीलदार, वन परिक्षेत्र अधिकारी, थाना प्रभारी और खनिज निरीक्षक अनुभागवार सप्ताह में दो बार संयुक्त भ्रमण कर जांच करेंगे। अनुविभाग स्तर के अधिकारी हर माह दो बार निरीक्षण कर कार्रवाई की समीक्षा करेंगे। तीनों राज्यों के संबंधित विभाग अवैध उत्खनन और परिवहन से जुड़ी सूचनाओं एवं आंकड़ों का आदान-प्रदान करेंगे तथा प्रत्येक तीन माह में अंतरराज्यीय बैठक आयोजित कर कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी।

श्री लिमाये ने कहा कि चंबल नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण संरक्षण के लिए अवैध रेत उत्खनन पर प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है। इसके लिए वन विभाग को अतिरिक्त अमला और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के साथ संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। चंबल के आसपास स्थित शासकीय भूमि को वन विभाग के अंतर्गत राजस्व चंबल अभयारण्य के लिए अंतरित करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। इसके लिए श्योपुर, मुरैना, भिण्ड, धौलपुर और आगरा जिलों में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

बैठक में प्राकृतिक रेत के विकल्प के रूप में एम-सैंड के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। जानकारी दी गई कि जिले में सिंध नदी की रेत के भंडारण के लिए 18 लाइसेंस जारी किए गए हैं और 39 एम-सैंड खदानें स्वीकृत की गई हैं। शासकीय निर्माण विभागों को निर्माण कार्यों में एम-सैंड के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए। वर्तमान में 10 करोड़ रुपये से अधिक लागत के निर्माण कार्यों में इसका उपयोग किया जा रहा है, जिससे प्राकृतिक रेत पर निर्भरता कम करने और चंबल के पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलने की उम्मीद है।

बैठक में ग्वालियर के मुख्य वन संरक्षक लोवित भारती, मुरैना कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़, भिण्ड कलेक्टर पवन जैन, धौलपुर कलेक्टर बी.टी. श्रीनिधि, भरतपुर के मुख्य वन संरक्षक पी. कथिरवेल, मुरैना पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीणा, भिण्ड पुलिस अधीक्षक सूरज वर्मा, धौलपुर पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान सहित विभिन्न जिलों के पुलिस, वन, खनिज, परिवहन और राजस्व विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

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