नैनीताल , मई 29 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने चंपावत के कथित सामूहिक दुराचार मामले में गिरफ्तार आनंद सिंह महरा को शुक्रवार को जमानत नहीं दी है। हालांकि राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ में हुई। आरोपी का जमानत प्रार्थना पत्र निचली अदालत से खारिज हो गया था। इसके बाद आरोपी की ओर से जमानत के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया है। आरोपी की ओर से कहा गया कि वह निर्दोष है। उसे झूठा फंसाया गया है। वह सामाजिक कार्यकर्ता है और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते उसके खिलाफ यह साजिश की गई है।

आरोपी की ओर से यह भी कहा गया कि एक ही मामले में पुलिस ने एक से अधिक अभियोग पंजीकृत किया है जो कि गलत है। अदालत ने आरोपी को जमानत नहीं देते हुए राज्य सरकार से विस्तृत आपत्ति पेश करने को कहा है।

मामले के अनुसार सामूहिक दुराचार का यह मामला पांच मई को सामने आया था। आरोप पूरन रावत, विनोद रावत और नवीन रावत पर लगाया गया था। हालांकि मेडिकल जांच में युवती के साथ दुराचार या किसी अनहोनी की पुष्टि नहीं हुई।

जांच के दौरान पुलिस ने कमल रावत और उसकी महिला मित्र अर्जिता राय को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने माना कि पूरे प्रकरण को साजिशन रचा गया और सामूहिक दुराचार का रूप देने की कोशिश की गई। साजिश में आनंद सिंह महरा का नाम भी सामने आने के बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। आरोपी के खिलाफ के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम, बीएनएस की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी 13 मई से जेल में बंद है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित