चंडीगढ़ , सितंबर 16 -- शिरोमणि अकाली दल पुनर्सुरजीत के अध्यक्ष ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से केंद्रशासित प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में प्रस्तावित नई भर्ती व्यवस्था पर कड़ी आपत्ति जताते हुए बुधवार को कहा कि इससे चंडीगढ़ की सरकारी नौकरियों और सेवाओं में पंजाब के ऐतिहासिक एवं प्रशासनिक अधिकार प्रभावित होंगे।

श्री सिंह ने दावा किया कि प्रस्तावित व्यवस्था में स्वास्थ्य विभाग के पदों का 40 प्रतिशत हिस्सा चंडीगढ़, 30 प्रतिशत हरियाणा और 30 प्रतिशत पंजाब के लिए निर्धारित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा प्रावधान लागू होता है तो यह पंजाब की हिस्सेदारी और चंडीगढ़ के साथ उसके ऐतिहासिक संबंधों को कमजोर करने वाला कदम होगा। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ केवल एक प्रशासनिक केंद्रशासित प्रदेश नहीं है, बल्कि पंजाब के पुनर्गठन से जुड़ा संवेदनशील विषय है। इसलिए चंडीगढ़ से संबंधित किसी भी बड़े नीतिगत फैसले से पहले पंजाब के अधिकारों और पूर्व में किए गए प्रबंधों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब के युवाओं के रोजगार के अवसरों से जुड़ी हिस्सेदारी को लगातार कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

शिअद पुनर्सुरजीत अध्यक्ष ने कहा कि पंजाब लंबे समय से अपनी राजधानी और चंडीगढ़ से जुड़े अधिकारों को लेकर अपना पक्ष रखता रहा है लेकिन इन मांगों की कथित तौर पर अनदेखी की जाती रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से 'चंडीगढ़ हेल्थ सर्विस रूल्स-2026' में पंजाब से संबंधित भर्ती अधिकारों की दोबारा समीक्षा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य के हितों को प्रभावित करने वाली किसी भी नई व्यवस्था को अंतिम रूप देने से पहले पंजाब सरकार और राज्य के प्रतिनिधियों से परामर्श किया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने नई भर्ती व्यवस्था का पूरा आधिकारिक विवरण सार्वजनिक करने की मांग की, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पंजाब के हिस्से में कितने पद और कौन से अधिकार रहेंगे।

श्री सिंह ने कहा कि पंजाब के अधिकारों की कीमत पर चंडीगढ़ में कोई नई व्यवस्था स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि उनका दल पंजाब के अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक और लोकतांत्रिक मंचों पर अपनी आवाज उठाएगा तथा केंद्र से इस मामले पर तत्काल पुनर्विचार करने का आग्रह किया।

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