चंडीगढ़ , जुलाई 30 -- चंडीगढ़ ट्राइसिटी कैब चालक संघ और जय दुर्गा ऑटो-रिक्शा कल्याण संघ के बैनर तले एग्रीगेटर नीति को सख्ती से लागू कराने की मांग को लेकर सेक्टर-25 रैली ग्राउंड में एक जून से जारी कैब और ऑटो चालकों का धरना आखिरकार प्रशासन की ओर से वार्ता के आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। यह आंदोलन 60 दिनों से अधिक समय तक चला।
संघ का आरोप है कि चंडीगढ़ की अधिसूचित एग्रीगेटर नीति के अनुसार कंपनियां अधिकतम 20 प्रतिशत कमीशन ही ले सकती हैं, लेकिन वास्तविकता में करीब 30 प्रतिशत तक कमीशन वसूला जा रहा है। इसके अलावा सीएनजी की बढ़ती कीमतों और परिचालन खर्चों को देखते हुए न्यूनतम किराया दरों में संशोधन, प्राइवेट व्हाइट प्लेट वाहनों को एग्रीगेटर ऐप्स से जोड़ने पर रोक तथा सब्सक्रिप्शन और पास सिस्टम खत्म करने की भी मांग की गई।
संघ के प्रधान ने कहा कि कंपनियां न तो ईंधन, वाहन, बीमा या चालकों के किसी खर्च की जिम्मेदारी उठाती हैं, जबकि चालकों को हर महीने वाहन की ईएमआई, बीमा, व्यावसायिक टैक्स, पीली नंबर प्लेट का शुल्क और अंतरराज्यीय टैक्स जैसी कई लागतें वहन करनी पड़ती हैं। उनका कहना है कि वैगनआर जैसी छोटी कैब की मासिक किस्त भी 17 से 20 हजार रुपये तक पहुंचती है, जिससे चालक आर्थिक दबाव में हैं।
उन्होंने कहा कि कंपनियां केवल ऐप सेवा उपलब्ध कराती हैं, इसलिए 20 प्रतिशत कमीशन भी अधिक है। यदि 200 रुपये की सवारी होती है तो कंपनी का हिस्सा सीमित और निश्चित होना चाहिए। संघ ने सरकार से कमीशन की एक तय और न्यूनतम राशि निर्धारित करने की मांग की ताकि चालकों और यात्रियों दोनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
संघ ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनियों की ओर से चालकों के लिए न तो चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है और न ही किसी दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में कोई जिम्मेदारी ली जाती है। इसके अलावा पैनिक बटन लगाने का दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन आपात स्थिति में उसके जरिए समय पर पुलिस या एंबुलेंस सहायता नहीं मिलती। यूनियन का दावा है कि ट्राइसिटी के करीब 35 हजार टैक्सी चालक इन समस्याओं से प्रभावित हैं।
आंदोलन के दौरान चालकों ने कई बार राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) कार्यालय और वीआईपी क्षेत्रों में प्रदर्शन किया। इससे पहले बढ़ते विरोध के बीच चंडीगढ़ प्रशासन 17 जून 2026 से ओला का एग्रीगेटर लाइसेंस छह माह के लिए निलंबित कर चुका है। इस आंदोलन को विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिला।
धरने के समापन से ठीक पहले दोपहर करीब 1:25 बजे संघ के प्रधान को चंडीगढ़ के प्रशासक की ओर से संदेश मिला, जिसमें 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात के लिए आमंत्रित किया गया। इसके बाद संघ ने धरना समाप्त करने की घोषणा की। संघ के नेताओं ने कहा कि वे प्रशासक के समक्ष अपनी सभी मांगें और समस्याएं विस्तार से रखेंगे तथा उन्हें उम्मीद है कि वार्ता के माध्यम से समाधान निकलेगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित