चंडीगढ़ , मई 19 -- केन्द्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा शुरू किया गया नक्शा परियोजना (नेशनल जियोस्पेशियल नॉलेज आधारित लैंड सर्वे ऑफ अर्बन हैबिटेशन्स) 15 जून तक पूरा कर लिया जाएगा। पायलट परियोजना के तहत शहर के पांच गांवों और 15 क्षेत्रों में डिजिटल भूमि सर्वे किया जा रहा है।
प्रशासन के अनुसार परियोजना में बुड़ैल, अटावा, कजहेड़ी, पलसौरा और सारंगपुर गांव शामिल हैं। इसके अलावा सेक्टर-2 से सेक्टर-17 तक के क्षेत्रों का सर्वे किया जा रहा है। संबंधित इलाकों में ड्रोन सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है। अब प्रशासन की टीमें घर-घर जाकर संपत्ति स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन कर रही हैं।
परियोजना के तहत इमारतों और जमीन का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। सर्वे टीम प्रत्येक संपत्ति की तस्वीर, क्षेत्रफल, ऊंचाई और उपयोग से जुड़ी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज कर रही है।
सर्वे के लिए प्रशासन ने 20 टीमों का गठन किया है, जो अलग-अलग सेक्टरों और गांवों में जाकर डेटा एकत्र कर रही हैं। अब तक संपत्तियों का रिकॉर्ड मैनुअल तरीके से रखा जाता था, जिससे रिकॉर्ड में गड़बड़ी, सीमाओं को लेकर विवाद और मालिकाना हक संबंधी समस्याएं सामने आती थीं।
परियोजना का कुल क्षेत्रफल 30.61 वर्ग किलोमीटर है, जहां करीब 1.47 लाख लोग रहते हैं। प्रशासन का लक्ष्य शहर की सभी इमारतों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है।
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