खरगोन , अगस्त 01 -- मध्य्रप्रदेश में खरगोन जिले के बड़वाह क्षेत्र में सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल एक मादा चिंकारा को ग्रामीणों ने आक्रामक श्वानों के हमले से बचा लिया, लेकिन बेहतर उपचार के लिए इंदौर ले जाते समय शनिवार को उसकी मौत हो गई।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार करीब तीन वर्ष आयु की अनुसूची-1 में संरक्षित मादा चिंकारा माचलपुर खुर्द और बर्दिया बंजारी गांवों के बीच किसी अज्ञात वाहन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गई थी। घायल होने के बावजूद वह पास के जंगल की ओर भागी, जहां श्वानों के झुंड ने उसे घेर लिया।
बंजारी निवासी रवि करोले ने खेत से लौटते समय घायल चिंकारा को श्वानों से घिरा देखा। उन्होंने अन्य ग्रामीणों की मदद से कुत्तों को खदेड़ दिया। हालांकि कुछ दूर भागने के बाद चिंकारा गिर पड़ी और दोबारा उठ नहीं सकी। उसके शरीर से अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था तथा उसका एक सींग, एक पैर और जबड़ा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त था। ग्रामीणों ने उसे पानी पिलाया और डायल-112 को सूचना दी।
सूचना मिलने पर बड़वाह थाना पुलिस तथा वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा और घायल चिंकारा को पाडल्या रेंज कार्यालय लाकर पशु चिकित्सकों से प्राथमिक उपचार कराया।
बड़वाह के वनमण्डलाधिकारी (डीएफओ) भानु प्रकाश बथमा ने बताया कि चिंकारा की हालत गंभीर होने के कारण उसे उन्नत उपचार के लिए इंदौर स्थित चिड़ियाघर भेजा गया था, लेकिन बलवाड़ा के समीप रास्ते में उसकी मौत हो गई।
उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर शिकार या पाईजनिंग की आशंका से इनकार किया गया है। रिपोर्ट से स्पष्ट है कि चिंकारा को किसी अज्ञात वाहन की टक्कर से गंभीर चोटें आई थीं।
श्री बथमा ने बताया कि अनुसूची-1 में संरक्षित इस वन्यजीव के शव को पाडल्या रेंज कार्यालय वापस लाकर निर्धारित वन्यजीव प्रोटोकॉल के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। घटना के संबंध में प्रारंभिक अपराध प्रकरण (पीओआर) दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
उन्होंने बताया कि चिंकारा खुले क्षेत्रों में रहना पसंद करता है और बड़वाह क्षेत्र में इसकी अच्छी संख्या है। स्थानीय ग्रामीण भी इस संरक्षित वन्यजीव के संरक्षण में सहयोग करते हैं।
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