पन्ना , मार्च 06 -- मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में हर तीज त्योहार बड़े ही अनूठे और निराले अंदाज में मनाया जाता है।

रंगों के पर्व होली पर यहाँ के सुप्रसिद्ध भगवान श्री जुगल किशोर जी मंदिर की छटा देखते ही बनती है। चैत्र माह की तृतीया को यहां भगवान श्री जुगुल किशोर जी सखी वेष धारण करते हैं। भगवान के इस नयनाभिराम अलौकिक स्वरूप के दर्शन वर्ष में सिर्फ एक बार होली के बाद तृतीया को ही होते हैं। यही वजह है कि सखी वेष के दर्शन करने पन्ना के श्री जुगुल किशोर जी मन्दिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है।

''मुरली मुकुट छीन पहनाय दियो घाघरा चोली, यशोदा के लाल को दुलैया सो सजायो है'', कृष्ण की भक्ति में लीन महिलायें जब ढोलक की थाप पर इस तरह के होली गीत गाते हुये गुलाल उड़ाकर नृत्य करती हैं तो पन्ना शहर में स्थित सुप्रसिद्ध श्री जुगुल किशोर जी मन्दिर में वृन्दावन जीवंत हो उठता है।

उल्लेखनीय है कि मन्दिरों के शहर पन्ना में स्थित श्री जुगुल किशोर जी का मन्दिर जन आस्था का केन्द्र है। इस भव्य और अनूठे मन्दिर में रंगों का पर्व होली वृन्दावन की तर्ज पर मनाया जाता है। तृतीया के दिन आज शुक्रवार को इस मन्दिर की रंगत देखते ही बन रही थी। सुबह 5 बजे से ही महिला श्रद्धालुओं का सैलाब भगवान के सखी वेष को निहारने और उनके सानिध्य में गुलाल की होली खेलने के लिये उमड़ पड़ा। ढोलक की थाप और मजीरों की सुमधुर ध्वनि के बीच महिला श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य की भक्ति और प्रेम में लीन होकर जब होली गीत और फाग गाया तो सभी के पाँव स्वमेव थिरकने लगे। फाग, नृत्य और गुलाल उड़ाने का यह सिलसिला सुबह 5 बजे से 11 बजे तक अनवरत चला।

यह अनूठी परम्परा श्री जुगुल किशोर जी मन्दिर में साढ़े तीन सौ वर्ष से भी अधिक समय से चली आ रही है जो आज भी कायम है।

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