बहराइच , सितंबर 27 -- उत्तर प्रदेश के जनपद बहराइच में नेपाल, उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों और जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। नदी के बढ़ते जलस्तर और बारिश से फसलों को हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय रविवार को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कैसरगंज तहसील के प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे। उन्होंने खेतों की पगडंडियों पर चलकर फसलों की स्थिति देखी और ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। जिलाधिकारी ने पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव और मुख्य विकास अधिकारी सुनील कुमार धनवंता समेत अन्य अधिकारियों के साथ संजय सेतु पहुंचकर घाघरा नदी के जलस्तर का जायजा लिया। अधिकारियों के अनुसार, एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.07 मीटर के सापेक्ष 106.14 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से सात सेंटीमीटर ऊपर है।
लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर से कृषि क्षेत्र पर पड़ रहे असर को देखते हुए जिलाधिकारी ने धान, गन्ना और केला समेत अन्य फसलों को हुए नुकसान का स्थलीय जायजा लिया। उन्होंने राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम को प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर फसलों का सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि सर्वेक्षण में पूरी पारदर्शिता बरती जाए और वास्तविक रूप से प्रभावित किसानों का विवरण तैयार किया जाए। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर शासन के निर्धारित मानकों के अनुसार पात्र किसानों को अनुमन्य अनुदान और क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों से संवाद के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि सभी उप जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संबंधित अधिकारियों के साथ निरंतर भ्रमणशील रहने और नदियों के जलस्तर पर सतर्क नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जलभराव अथवा बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने पर नदी के आसपास रहने वाले लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए।उन्होंने ग्रामीणों को सतर्क रहने, अनावश्यक रूप से पानी में नहीं जाने और बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी। जिलाधिकारी ने कहा कि दैवी आपदा से प्रभावित लोगों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराना शासन और प्रशासन की प्राथमिकता है।
जिलाधिकारी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से आच्छादित किसानों को फसल नुकसान की सूचना निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय से देने के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार स्थानीयकृत आपदा अथवा फसल नुकसान की स्थिति में 72 घंटे के भीतर संबंधित बीमा कंपनी, बैंक, कृषि विभाग अथवा टोल फ्री नंबर 14447 पर सूचना देना आवश्यक है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि नुकसान की सूचना देते समय आधार संख्या, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) क्रमांक, फसल बीमा पॉलिसी नंबर, फसल का नाम, क्षेत्रफल और क्षति का विवरण अपने पास रखें, ताकि शिकायत दर्ज कराने और आगे की प्रक्रिया में सुविधा हो सके।
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