मुंबई , मार्च 11 -- घरेलू गैस के दामों में हाल ही में हुई बढ़ोतरी के बाद अब सरकार ने वाहनों में इस्तेमाल होने वाली गैस की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी की घोषणा की है जिससे ऑटो रिक्शा चालकों और अन्य परिवहन संचालकों के बीच गहरी चिंता पैदा हो गई है।
खाड़ी देशों में जारी युद्ध के कारण पैदा हुई गैस की कमी की वजह से इसकी कीमतों में तेज उछाल आया है। बताया जा रहा है कि इस युद्ध में दोनों पक्षों ने कई तेल कुओं और शोधन केंद्रों को नुकसान पहुंचाया है, जिसके चलते कई देशों को अपनी कुछ परियोजनाओं में उत्पादन अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। इसके अलावा, ईरान ने 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से होने वाली आवाजाही को रोक दिया है, जो तेल के परिवहन का एक बड़ा वैश्विक रास्ता है। इस रुकावट का अंतरराष्ट्रीय ईंधन आपूर्ति पर बुरा असर पड़ा है, जिससे कई देशों में पेट्रोलियम व गैस की किल्लत हो रही है और कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है।
इसी पृष्ठभूमि में, हाल ही में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम 60 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ा दिए गए थे। वहीं दूसरी ओर, व्यावसायिक गैस की आपूर्ति कथित तौर पर रोक दी गई है, जिससे होटल और रेस्तरां मालिकों के सामने बड़ी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं क्योंकि उनका काम पूरी तरह इसी ईंधन पर निर्भर है। अब इसका असर परिवहन क्षेत्र पर भी पड़ने लगा है। वाहनों में इस्तेमाल होने वाली गैस की कीमतें 62 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 75 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं - यानी एक ही बार में सीधे 13 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी हुई है।
यात्रियों और चालकों दोनों पर इस बढ़ी हुई कीमत का असर पड़ने की संभावना है। ऑटो रिक्शा चालक, जिनमें से अधिकतर ने कम लागत की वजह से गैस से चलने वाले वाहनों को चुना था, अचानक बढ़े हुए खर्चों को लेकर बेहद परेशान हैं। गैस और अन्य ईंधन की कीमतों का अंतर कम होने से, चालकों को डर है कि इसका उनकी रोज की कमाई पर बुरा असर पड़ेगा।
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