ग्वालियर , अक्टूबर 08 -- मध्यप्रदेश के ग्वालियर में साइबर ठगों ने अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों के बैंक खातों से करीब पांच लाख रुपये की राशि निकाल ली। झांसी रोड थाना क्षेत्र में 61 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी के खाते से बैंक एप वेरिफिकेशन के नाम पर 2,99,980 रुपये निकाले गए। वहीं एक बुजुर्ग से ऑनलाइन टी-शर्ट के पार्सल का पता अपडेट कराने के नाम पर 99,500 रुपये तथा थाटीपुर थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति के खाते से यूपीआई के जरिए 90 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए।
झांसी रोड थाना क्षेत्र के सी-22 हरिशंकरपुरम निवासी 61 वर्षीय रामसिंह परमार, बैंक ऑफ इंडिया के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने दो अक्टूबर को गूगल से बैंक ऑफ इंडिया का मोबाइल एप डाउनलोड किया था। चार अक्टूबर को उनके मोबाइल पर एक नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को बैंक कर्मचारी बताते हुए एप का वेरिफिकेशन करने की बात कही। संदेह होने पर रामसिंह ने गूगल से मिले बैंक कस्टमर केयर नंबर पर फोन कर इसकी पुष्टि की। वहां से उक्त नंबर को बैंक का बताए जाने के बाद उन्होंने कॉल करने वाले को बैंक संबंधी जानकारी दे दी। इसके बाद उनके मोबाइल पर ओटीपी आने लगे और खाते से 99,990 रुपये के दो तथा एक लाख रुपये का एक लेनदेन हुआ। कुल 2,99,980 रुपये निकल गए। शिकायत के बाद झांसी रोड थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
चिटनिस गोठ निवासी 69 वर्षीय दिलीप निगडीकर से ऑनलाइन टी-शर्ट का ऑर्डर करने के बाद आए फर्जी कॉल के जरिए ठगी की गई। पुलिस के अनुसार नौ अप्रैल 2025 की रात करीब साढ़े आठ बजे उनके मोबाइल पर कॉल आया। कॉल करने वाले ने कहा कि तीन अप्रैल को ऑनलाइन टी-शर्ट का ऑर्डर किया गया था, लेकिन पता अपडेट नहीं होने से पार्सल पहुंचाने में दिक्कत हो रही है। इसके बाद आरोपी ने मोबाइल से पता अपडेट करने की प्रक्रिया कराई और सर्वर की समस्या बताकर उन्हें उलझाए रखा। कुछ देर बाद मोबाइल की स्क्रीन काली हो गई और वह बंद भी नहीं हो रहा था। करीब आधे घंटे बाद बैंक खाता देखने पर चार लेनदेन में कुल 99,500 रुपये निकल चुके थे।
थाटीपुर पुलिस कॉलोनी निवासी 47 वर्षीय देवेन्द्र सिंह के खाते से भी साइबर ठगी की गई। उन्होंने छह अक्टूबर को सुबह करीब साढ़े नौ बजे फोन-पे से एसबीआई खाते का बैलेंस देखा तो राशि कम मिली। बैंक जाकर जानकारी लेने पर पता चला कि दो अक्टूबर को यूपीआई के जरिए 90 हजार रुपये किसी अन्य खाते में ट्रांसफर किए गए हैं। देवेन्द्र ने राशि ट्रांसफर करने से इनकार किया। बैंक से साइबर फ्रॉड की जानकारी मिलने पर उन्होंने तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।
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