बिलासपुर , मई 20 -- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप न्यायिक कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित, संसाधन-सक्षम और सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

यह जानकारी आज दी गई। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के निर्देश पर उच्च न्यायालय प्रशासन ने ग्रीष्मकालीन अवकाश को लेकर विशेष परिपत्र जारी किया है, जिसके तहत अवकाश अवधि में मामलों की सुनवाई मुख्य रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जाएगी।

जारी परिपत्र के अनुसार, भीषण गर्मी के दौरान अधिवक्ताओं और याचिकाकर्ताओं को अनावश्यक रूप से अदालत आने से राहत देने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है। उच्च न्यायालय प्रशासन का कहना है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई से आवागमन कम होगा तथा समय और संसाधनों की बचत भी सुनिश्चित की जा सकेगी।

परिपत्र में उच्च न्यायालय एवं जिला न्यायपालिका के कर्मचारियों के लिए सप्ताह में अधिकतम दो दिन "वर्क फ्रॉम होम" की सुविधा देने का प्रस्ताव भी रखा गया है। हालांकि इसके लिए यह अनिवार्य किया गया है कि कार्यालय में कम से कम 50 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति बनी रहे, ताकि न्यायिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों। घर से कार्य करने वाले कर्मचारियों को फोन और अन्य अधिकृत माध्यमों से उपलब्ध रहना होगा।

इसके अलावा ईंधन की बचत और सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से न्यायिक अधिकारियों, रजिस्ट्री अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच कार-पूलिंग व्यवस्था अपनाने का सुझाव दिया गया है। परिपत्र में न्यायाधीशों को भी आवश्यकता अनुसार कार-पूलिंग के लिए प्रोत्साहित किए जाने की बात कही गई है।

न्यायालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए संबंधित रजिस्ट्री अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

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