वाशिंगटन , जनवरी 21 -- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ग्रीनलैंड तनाव के बीच विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) में भाग लेने के लिए स्विट्जरलैंड के दावोस रवाना हो गए हैं जहां वह मुख्य भाषण देने वाले हैं।
इससे पहले उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद एयरफोर्स वन विमान में 'मामूली खराबी' का पता चलने के बाद दूसरे विमान से 'एयर फ़ोर्स वन' को जॉइंट बेस एंड्रयूज पर वापस लौटना पड़ा।
व्हाइट हाउस रैपिड रिस्पांस टीम ने 'एक्स' पर बताया कि उड़ान भरने के बाद एयर फ़ोर्स वन के चालक दल ने एक मामूली बिजली संबंधी समस्या की पहचान की। सावधानी बरतते हुए एयर फ़ोर्स वन को जॉइंट बेस एंड्रयूज वापस लौटना पड़ा। राष्ट्रपति और उनकी टीम दूसरे विमान से स्विट्जरलैंड की यात्रा जारी रखेंगे।
गौरतलब है कि श्री ट्रम्प की यह यात्रा ग्रीनलैंड को अधिग्रहित करने के उनके प्रयास और इसके परिणामस्वरूप अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि आर्कटिक क्षेत्र पर चर्चा करने के लिए दावोस में उनकी 'कई बैठकें' निर्धारित हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह अमेरिकी हितों को आगे बढ़ाने के लिए आयात शुल्क से इतर अन्य साधनों का भी उपयोग कर सकते हैं।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने श्री ट्रम्प के रुख की आलोचना करते हुए चेतावनी दी कि इससे एक ऐसी दुनिया का निर्माण होगा, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून पैरों तले रौंदे जाएंगे।
छह वर्षों में पहली बार विश्व आर्थिक मंच में शामिल होने जा रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति की अन्य वैश्विक नेताओं के साथ बैठक करने की योजना है, जिससे दुनिया भर की निगाहें उनकी इस यात्रा पर टिकी हुई है। यह यात्रा इस पृष्ठभूमि में और भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि दावोस जाने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने वैश्विक नेताओं के संदेशों के स्क्रीनशॉट अपने सोशल मीडिया मंच सोशल ट्रूथ पर साझा कर स्पष्ट कर दिया है कि ग्रीनलैंड के मुद्दे पर उनके रुख में नरमी के कोई आसार नहीं।
ऐसी खबरें सामने आई हैं कि ट्रम्प ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर को एक संदेश भेजा है, जिसमें उन्होंने संकेत दिया है कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार न मिलना ग्रीनलैंड के खिलाफ उनकी धमकियों के कारकों में से एक था।
नाटो महासचिव मार्क रुटे भी उन व्यक्तियों में शामिल हैं जिनसे इस शिखर सम्मेलन के इतर श्री ट्रम्प के मिलने की उम्मीद है।
अमेरिकी राष्ट्रपति के दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा हुआ है और इस दौरान यूरोपीय नेताओं ने विभिन्न मुद्दों पर उनका विरोध करने या टकराव से बचने का रास्ता अपनाया है, लेकिन ग्रीनलैंड पर बढ़ते तनाव ने समीकरण को बदल दिया है तथा यूरोपीय नेताओं को भी अपना रुख बदलने पर मजबूर कर दिया है।
इससे पहले श्री ट्रंप के प्रस्तावित 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल नहीं होने के फ्रांस के फैसले पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने फ्रांसिसी वाइन और शेंपेन पर 200 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की धमकी दी है। दोनों नेताओं के बीच तनाव तब और बढ़ता नजर आया जब श्री ट्रंप ने श्री मैक्रॉन के निजी संदेश को अपने सोशल मीडिया सोशल पर सार्वजनिक कर दिया।
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