लखनऊ , जून 2 -- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों को अब गांव में ही सरकार का अनुभव मिलने लगा है। प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों में ग्राम सचिवालय स्थापित कर ग्रामीणों को आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, पेंशन, मनरेगा, जन्म-मृत्यु पंजीकरण सहित अन्य सरकारी सेवाएं घर के पास उपलब्ध कराई जा रही हैं।
पिछले पांच वर्षों में 24,311 नए पंचायत भवनों का निर्माण किया गया है। इन भवनों को कम्प्यूटर, इंटरनेट, फर्नीचर, पेयजल और स्वच्छता सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। प्रत्येक पंचायत में पंचायत सहायक और डाटा एंट्री ऑपरेटर तैनात किए गए हैं, ताकि डिजिटल सेवाओं का संचालन सुचारू हो सके। निर्माण गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 1,875 रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट और कंसल्टिंग इंजीनियरों को इम्पैनल किया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ग्राम सचिवालयों में जियो-फेन्स्ड और क्यूआर कोड तकनीक लागू की गई है। पंचायतों को भेजी जाने वाली धनराशि का भुगतान इसी सिस्टम से होता है और एआई मॉडल के जरिए व्यय की निगरानी की जा रही है। सरकार के अधिकारियों का कहना है कि स्थायी पंचायत भवनों से पंचायत बैठकों, जनसुनवाई और विकास योजनाओं की निगरानी आसान हुई है। इससे ग्रामीण प्रशासन में जवाबदेही बढ़ी है और योजनाएं गांव तक तेजी से पहुंच रही हैं।
ग्राम सचिवालयों का यह नेटवर्क गांवों को आत्मनिर्भर, डिजिटल और सशक्त बनाने की दिशा में अहम मील का पत्थर माना जा रहा है।
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