पटना , फरवरी 25 -- िहार के ग्रामीण इलाकों में अब केवल पक्की सड़कों का विस्तार ही नहीं हो रहा है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि ग्रामीण सड़कों पर सफर करना पहले से अधिक सुरक्षित हो।
सड़क दुर्घटनाओं में होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए ग्रामीण कार्य विभाग ने तकनीकी और जमीनी स्तर पर एक बड़ी पहल की है। सर्वोच्च न्यायालय और परिवहन विभाग के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए विभाग ने निर्मित और निर्माणाधीन सभी ग्रामीण सड़कों तथा पुलों पर सड़क सुरक्षा मानकों को अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत अब ग्रामीण सड़कों पर क्रैश बारियर, स्टॉप साइन, जेबरा क्रासिंग, स्पीड ब्रेकर ,स्पीट लिमिट साइन, जंक्शन अहेड साइन जैसे महत्वपूर्ण सुरक्षा अवयवों का आवश्यक रूप से अधिष्ठापन किया जा रहा है।
इस पूरी सुरक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए विभाग ने अपने स्टेट एमआईएस सिस्टम में एक नया रोड सेफ्टी मॉड्यूल विकसित किया है। विभाग के सभी कार्यपालक, सहायक और कनीय अभियंताओं को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे स्वयं सड़क का निरीक्षण कर इस मॉड्यूल में सुरक्षा मानकों की आवश्यक जानकारी जियो टैग तस्वीरों के साथ अपलोड करें। इस कार्य में तेजी लाने के लिए अभियंताओं को एमआईसी पर अद्यतन करने का निर्देश दिया गया है।
ग्रामीण सड़कों पर विशेष रूप से पैदल यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राज्यभर के ग्रामीण पथों के अंतर्गत आने वाले जंक्शन, विद्यालय, अस्पताल, बाजार एवं अन्य प्रमुख स्थलों पर आवश्यक रूप से जेब्रा क्रॉसिंग के निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। इस क्रम में विभाग द्वारा अब तक कुल 31,742 स्थलों पर जेब्रा क्रॉसिंग चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से 13,970 स्थलों पर जेब्रा क्रॉसिंग का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। शेष चिन्हित स्थलों पर आवश्यक जाँच एवं जेब्रा क्रॉसिंग से संबंधित अधिष्ठापन का कार्य प्रक्रियाधीन है, जिसे शीघ्र पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पैदल यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।
सड़क से संबंधित हादसों के त्वरित विश्लेषण और सड़कों की इंजीनियरिंग में सुधार के लिए ग्रामीण कार्य विभाग ने पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर एनआईसी द्वारा विकसित किए गए आईआरएडी.ईडीएआर पोर्टल का भी प्रभावी उपयोग प्रारंभ किया है। अब किसी भी ग्रामीण सड़क पर दुर्घटना होने पर संबंधित थाने के पुलिस पदाधिकारी या थाना प्रभारी द्वारा पोर्टल पर संबंधित ग्रामीण सड़क की जानकारी प्रविष्टि करते ही ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता उस मामले से संबंधित सड़क की तकनीकी जाँच करते हैं और यदि सड़क में किसी प्रकार के सुधार की आवश्यकता होती है, तो उसका तुरंत निराकरण कर पोर्टल पर प्रतिवेदन अद्यतन करते हैं।
इस मामले में विभाग की सक्रियता का ही परिणाम है कि आईआरएडी पोर्टल पर लंबित मामलों की संख्या जो पिछले महीने की 06 जनवरी को 395 थी, वह तेजी से घटकर 23 फरवरी तक मात्र 185 रह गई है। इन सभी प्रयासों और सुरक्षा मानकों की सख्ती से पालन के साथ ग्रामीण कार्य विभाग राज्य की ग्रामीण सड़कों को पूर्णतः सुरक्षित और दुर्घटना-मुक्त बनाने की दिशा में प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
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