नयी दिल्ली , मार्च 11 -- विपक्ष ने राज्य सभा में ग्रामीण विकास मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा के दौरान बुधवार को जल जीवन मिशन जैसी कुछ योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन का मुद्दा उठाया और केन्द्र पर उनकी सरकारों वाले राज्यों की योजनाओं में भेदभाव किये जाने का भी आरोप लगाया है।

विपक्ष के कुछ सदस्यों ने इस दौरान ईरान की लड़ाई से गैस की कमी का मुद्दा भी उठाया और कहा कि संसद को इस स्थिति का विचार करना चाहिए।

इसके विपरीत सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मोदी सरकार के एक दशक के कार्यकाल में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का रुपांतरण करने वाली मोदी सरकार की पहलों की सराहना की और कहा कि इससे गांवों के लोगों का सशक्तीकरण हुआ है।

मंगलवार को शुरू हुई इस चर्चा को आगे बढ़ाते हुए आम आदमी पार्टी (आप) के संजय सिंह ने कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्र के लिए विभिन्न योजनाओं का डंका जरूर पीटती है पर जल जीवन मिशन जैसी एक महत्वपूर्ण योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। उन्होंने कहा कि इस योजना में बनी बहुत सी पानी की टंकियां और पाइपों के नेटवर्क उद्घाटन से पहले उजड़ गये हैं। श्री सिंह ने कहा कि गांवों में पानी के पाइप बिछाने के लिए खड़ंजे और सड़कें खोद दी गयी हैं और गांवों का जीवन अस्त व्यस्त हो गया है।

श्री सिंह ने मनरेगा योजना की जगह लायी गयी जी राम जी योजना के लिए बजट के अपर्याप्त होने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नयी योजना में 100 की जगह 125 दिन के रोजगार की गारंटी है जबकि बजट मात्र दो हजार करोड़ रुपये बढ़ा कर 88 हजार करोड़ रुपये किया उन्होंने जी राम जी योजना में 40 प्रतिशत वित्तीय बोझ संसाधनों की तंगी से जूझ रहे राज्यों पर डाले जाने की आलोचना की है।

उन्होंने पश्चिम एशिया संकट के चलते रसाेई गैस के संकट का भी मुद्दा उठाया और कहा कि इससे उज्जवला योजना सहित गांवों में 21 करोड़ गैस कनेक्शन धारकों के लिए गैस नहीं मिल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पंजाब के ग्रामीण विकास का 8000 करोड़ रुपये दबा लिया है जबकि राज्य में पिछली बाढ़ के समय घोषित 1600 करोड़ रुपये की सहायता में से 16 पैसे नहीं मिले हैं।

उनके भाषण के दौरान ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज चौहान ने कहा 'मैं हर बात का जवाब दूंगा, विपक्षी सदस्य को जवाब सुनने के लिए सदन में रुकना होगा।'भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने कहा कि भारत का ग्रामीण क्षेत्र आज भी चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि इस बार के बजट में ग्रामीण विकास के लिए 2.14 लाख करोड़ रुपये से कुछ अधिक का बजट है जो पर्याप्त नहीं है। उन्होंने जी राम जी योजना की जरूरत को देखते हुए इसके बजट को भी कम बताया।

भाजपा की रेखा शर्मा ने संप्रग के समय की 70 हजार करोड़ रुपये की किसाना ऋण माफी योजना का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली पिछली सरकारों ने गांवाें और गरीब के नाम पर केवल ढोंग किया था। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सड़क संपर्क, बुनियादी ढांचा, पशुपालन, मछली पालन जैसी योजनाओं ग्रामीण क्षेत्र में लोगों की क्षमता का विकास किया। उन्होंने कहा कि सड़क केवल संपर्क सुविधा नहीं , महिलाओं की सुरक्षित यात्रा, मरीजों के लिए स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच और रोजगार के अवसरों का रास्ता होती हैं।

द्रमुक के डॉ तिरुची शिवा ने भी ईरान की लड़ाई से देश में ईंधन संकट का मुद्दा उठाया । श्री शिवा ने कहा कि भारत लड़ाई में नहीं लगा है पर देश में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित है। एलपीजी न मिलने से रेस्त्रां बंद हो रहे हैं, घर प्रभावित हुए है। उन्होंने इस मुद्दे पर संसद में बहस कराये जाने की मांग की। उन्होंने मनरेगा योजना में जी राम जी के जरिए किये गये बदलाव की आलोचना करते हुए कहा कि शत प्रतिशत केंद्रीय सहायता से चलने वाली योजना का 40 प्रतिशत वित्तीय भार अब राज्यों पर डाल दिया गया है।

बसपा के राम जी ने कहा कि सरकार आंकड़े उछाल कर जितनी भी वाहवाही लूटे लेकिन अब भी लाखों गावों में अच्छी सड़क, शिक्षा और चिकित्सा की सुविधाएं नहीं है। गांवों में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों की बस्तियों की उपेक्षा होती है।

भाजपा के अनिल सुखदेवराव बोंडे और इसी पार्टी के मयंक कुमार नायक ने मोदी सरकार के दौर में ग्रामीण क्षेत्र में विकास के विभिन्न कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि योजनाओं का पैसा लाेगों तक पहुंच रहा है।

शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र पर महाराष्ट्र के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में कृषि क्षेत्र अब भी संकट में है और किसानों की आत्म हत्या के मामले लगातार आ रहे हैं।

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