नयी दिल्ली , मार्च 10 -- विपक्षी दलों ने ग्रामीण क्षेत्रों को देश की अर्थव्यवस्था की धुरी बताते हुए राज्यसभा में कहा कि केवल कागजों पर योजनाएं बनाने और आंकड़ों मात्र से गांवों का विकास नहीं होगा इसके लिए योजनाओं की घोषणाओं और जमीन पर उनके क्रियान्वयन में अंतर को दूर करना जरुरी है। वहीं सत्ता पक्ष ने कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं से गांवों को मजबूत बनाकर विकसित भारत की मजबूत नींव रख रही है।

कांग्रेस की रजनी पाटिल ने मंगलवार को सदन में ग्रामीण विकास मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि सरकार ग्रामीण विकास के जो आंकड़े बताती है गांवों में उसकी वास्तविक तस्वीर अलग है। उन्होंने कहा कि योजनाओं के लिए आवंटन किया जा रहा है लेकिन सवाल यह है कि इसमें से कितना व्यय हो पाता है और उसका वास्तव में कितना फायदा होता है। उन्होंने योजनाओं को मांग के आधार पर बनाये जाने की मांग करते हुए कहा कि इनके अमल के लिए जवाबदेह तंत्र बनाये जाने की भी जरूरत है।

कांग्रेस सदस्य ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलकर विकसित भारत जी राम जी रख दिया गया है लेकिन सवाल यह है कि क्या इससे जमीन पर स्थिति बदली है। उन्होंने कहा कि नयी योजना में वर्ष में 125 दिन के रोजगार की गारंटी की बात कही गयी है लेकिन सच्चाई यह है कि अब तक इस योजना के तहत औसतन 48 दिन का काम दिया जाता रहा है तो 125 दिन का रोजगार कैसे दिया जायेगा। उन्होंने इस योजना में राज्यों का हिस्सा 40 प्रतिशत कम करने पर भी सवाल उठाया और कहा कि जो राज्य पहले से कर्ज में दबे हैं वह मजदूरों का भुगतान कैसे करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि किसी मजदूर को 15 दिन में काम नहीं मिलता तो उसे मजदूरी भत्ता दिये जाने का प्रावधान है लेकिन इसे अमल में नहीं लाया जाता।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत अभी भी 30 प्रतिशत लाभार्थियों को मकान नहीं मिल पाये हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनायी जा रही सड़कों की मरम्मत और रख रखाव का मुद्दा भी उठाया। सदस्य ने वृद्धावस्था मासिक योजना में दी जाने वाली राशि को बहुत कम बताते हुए इसे बढाये जाने की जरूरत पर बल दिया।

श्रीमती पाटिल ने कहा कि केवल बजटीय आवंटन बढाये जाने से परिणाम नहीं मिलेंगे इसके लिए योजनाओं को जमीन पर उतारना होगा।

भाजपा के के लक्ष्मण ने ग्रामीण विकास मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं को ठोस तरीके से क्रियान्वित कर विकसित भारत की मजबूत नींव रखी जा रही है। उन्होंने विकसित भारत जी राम जी कानून को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को अपने ही क्षेत्रों में काम मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 54 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है जो पिछली बार से कहीं अधिक है। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र लाभार्थियों के लिए पक्के मकान बनाये जा रहे हैं।

भाजपा सदस्य ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान योजना से किसानों का कल्याण और मत्स्य योजना से मछुआरों का कल्याण किया जा रहा है। इसके अलावा प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से लोगों को कुशल तथा हुनरमंद बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं का सशक्तिकरण किया जा रहा है।

तृणमूल कांग्रेस के मोहम्मद नदीमुल हक ने गृह मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के कामकाज पर भी चर्चा कराये जाने की मांग की। उन्होंने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाताओं के नाम सूची से हटाये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर में अनियमितताओं के चलते राज्य की मुख्यमंत्री को धरने पर बैठना पड़ रहा है।

उन्होंने बंगाल के साथ सौतेला व्यवहार किये जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस मंत्रालय के तहत विभिन्न मदों में पश्चिम बंगाल का कुल 79 हजार करोड़ रुपया केन्द्र सरकार पर बकाया है। उन्होंने कहा कि यह सहकारी संघवाद की भावना पर हमला है। उन्होंने अनेक योजनाओं में आवंटित राशि में से बहुत कम राशि के व्यय पर भी सवाल उठाया।

बीजू जनता दल की सुलता देव ने ग्रामीण विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं में ओड़िशा का आवंटन कम करने पर सवाल उठाया और पूछा कि इससे गांवाें का विकास कैसे होगा। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए मंडी में फसल बेचने की व्यवस्था नहीं है। ओड़िशा में आपदा प्रभावित क्षेत्र सबसे अधिक है लेकिन केन्द्र की ओर से समूचित मदद नहीं मिलती। सदस्य ने राज्य के आदिवासी समुदाय की उपेक्षा का भी आरोप लगाया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित