जगदलपुर , अगस्त 18 -- छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर ग्रामीण महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार पर्यावरण-अनुकूल राखियों की प्रदर्शनी मंगलवार को यहां कलेक्टोरेट परिसर में लगाई गई।

धान, चावल, बीज, बांस और प्राकृतिक धागों सहित स्थानीय सामग्रियों से तैयार इन राखियों को अधिकारियों, कर्मचारियों और नागरिकों ने उत्साह के साथ खरीदा।

प्रदर्शनी में जगदलपुर, बकावंड और बस्तर विकासखंड के विभिन्न गांवों से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों ने हस्तनिर्मित राखियों के स्टॉल लगाए।

जिला कलेक्टर आकाश छिकारा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तन्मय खन्ना और सहायक कलेक्टर यशवंत नायक ने स्टॉल का अवलोकन किया तथा राखियां खरीदकर समूह की महिलाओं का उत्साह बढ़ाया।

महिलाओं ने धान, चावल, लालभाजी और खीरे के बीज, मयूर पंख, बांस, प्राकृतिक धागे और कौड़ियों का उपयोग कर पर्यावरण-अनुकूल राखियां तैयार की हैं। इन राखियों में बस्तर की स्थानीय कला और संस्कृति की झलक भी देखने को मिली।

जिला प्रशासन के अनुसार ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान आड़ावाल में 21 से 26 जुलाई तक विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया था। इसमें जिले के सातों जनपदों की 30 महिलाओं को राखी निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को डिजाइन चयन, रंग संयोजन, गुणवत्ता, पैकेजिंग तथा प्राकृतिक सामग्रियों से राखियां तैयार करने की बारीकियां बताई गईं। प्रशिक्षण के बाद इन महिलाओं ने अपने क्षेत्रों की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर राखियों का निर्माण शुरू किया।

प्रशासन का कहना है कि कलेक्टोरेट परिसर में स्टॉल उपलब्ध कराने से महिला समूहों को बिचौलियों के बिना अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर मिला है। इससे स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन मिलने के साथ ग्रामीण महिलाओं की आजीविका और आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिल रहा है।

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