दरभंगा , जुलाई 25 -- ाष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की महत्वाकांक्षी योजना "सामुदायिक मध्यस्थता : ग्रामीण भारत को मुकदमेबाजी मुक्त बनाने की ओर" के दूसरे चरण की शुरुआत बिहार के दरभंगा जिले में भी कर दी गई है।ग्रामीण क्षेत्रों में मुकदमेबाजी कम करने और आपसी संवाद के माध्यम से विवादों का समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस पहल के तहत जिले के पांच गांवों का चयन किया गया है, जहां प्रशिक्षित सामुदायिक मध्यस्थ स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के एडीआर भवन में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष अजय कुमार शर्मा ने कहा कि इस योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीण समाज में शांति, सौहार्द और सामाजिक समरसता को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि यदि छोटे विवादों का समय रहते बातचीत और आपसी समझ से समाधान कर लिया जाए तो वे वे बड़े कानूनी विवाद का रूप नहीं लेते। इसके लिए पक्षकारों के बीच संवाद, एक-दूसरे की बात सुनने और समाधान खोजने की संस्कृति विकसित करना आवश्यक है।
कार्यक्रम में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जुनैद आलम तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव आरती कुमारी ने भी सामुदायिक मध्यस्थों को संबोधित किया। आरती कुमारी ने बताया कि योजना के तहत सदर थाना क्षेत्र के मझिगामा और रानीपुर, अशोक पेपर मिल थाना क्षेत्र के अनारकोठी और बलिया तथा मोरो थाना क्षेत्र के अरैला गांव का चयन किया गया है।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के बाद इन गांवों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि लोग न्यायालय जाने से पहले आपसी सहमति और मध्यस्थता के माध्यम से विवादों का समाधान करने के लिए प्रेरित हों। इसके साथ ही योग्य मामलों का निस्तारण सामुदायिक मध्यस्थता के जरिए कराया जाएगा। इस उद्देश्य से मध्यस्थों को संवाद, संचार कौशल और विवाद समाधान की आधुनिक तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
कार्यक्रम में विधिक सेवा के प्रशिक्षित मध्यस्थ, चयनित गांवों के सामुदायिक मध्यस्थ, संबंधित थाना के अधिकारी तथा पारा विधिक स्वयंसेवक भी उपस्थित थे।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार की यह पहल न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम करने, ग्रामीण स्तर पर वैकल्पिक विवाद समाधान को मजबूत करने और "सुलभ एवं त्वरित न्याय" की अवधारणा को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कानूनविदों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल होता है तो देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक सौहार्द बढ़ाने और अनावश्यक मुकदमेबाजी घटाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
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