पटना , मई 06 -- ग्रामीण कार्य विभाग ने न्यायालयीन वादों के ससमय निष्पादन और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर अत्यंत सख्त रुख अपनाया है।
पिछले 24 अप्रैल को अपर सचिव अभय झा की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रशाखा-07 तथा न्यायिक मामलों से जुड़े वरीय एवं कनीय पदाधिकारियों, प्रशाखा पदाधिकारी एवं सहायक प्रशाखा पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में प्रशाखा-07 के आवंटित कार्यों, न्यायालयीन वादों की अद्यतन स्थिति, कर्म-पुस्ति में प्राप्त पत्रों, क्रियाशील संचिकाओं एवं लंबित मामलों की समीक्षा की गई।
समीक्षा के दौरान न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में विलंब को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए कड़े निर्देश दिए गए। इस दिशा में न्यायिक मामलों में लापरवाही बरतने वाले पदाधिकारियों एवं कर्मियों को चेतावनी दी गई। बैठक में स्पष्ट किया गया कि यदि शपथ पत्र दायर न होने के कारण माननीय न्यायालय को पुनः समय देना पड़े, तो इसे गंभीर प्रशासनिक चूक मानते हुए संबंधित कर्मियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
न्यायालयीन मामलों की पारदर्शी और निरंतर मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के लिये विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अभियंता प्रमुख से लेकर कार्यपालक अभियंता स्तर तक के सभी कार्यालय प्रधानों को प्रतिदिन कार्यालय छोड़ने से पूर्व सीसीएमएस पोर्टल अनिवार्य रूप से जांचने का निर्देश दिया गया है। इसके अतिरिक्त, किसी भी वाद की निर्धारित सुनवाई तिथि से एक सप्ताह पूर्व हर हाल में शपथ पत्र दायर करने तथा प्रशासनिक तेजी के लिए प्रत्येक सोमवार को अपर सचिव के स्तर से लीगल सेक्शन की अनिवार्य समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है। बैठक के अंत में न्यायिक मामलों में न्यायालय द्वारा पारित आदेशों की अद्यतन सूची बनाने और उसका निरंतर अनुश्रवण करने के लिए अवर सचिव प्रभात कुमार के उत्कृष्ट कार्यों की विशेष रूप से सराहना की गई, जो विभाग में एक जवाबदेह, पारदर्शी और त्वरित कार्यसंस्कृति विकसित करने की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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