सोनभद्र , मई 11 -- गोविष्ट यात्रा के तहत सोनभद्र पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सोमवार को कहा कि गौ माता के प्राणों और उनकी प्रतिष्ठा की रक्षा करना उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि गौ संरक्षण के मुद्दे पर देश के राजनीतिक दलों और नेताओं से उन्हें निराशा मिली है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह स्पष्ट हो गया है कि कई नेता और राजनीतिक दल गौ हत्यारों से धन लेकर राजनीति कर रहे हैं, इसलिए उनसे गौ हत्या बंद कराने की उम्मीद करना व्यर्थ है।

उन्होंने कहा कि यह धारणा गलत तरीके से फैलाई गई है कि केरल और पश्चिम बंगाल में गायों को सबसे अधिक खतरा है। उनके अनुसार सरकारी आंकड़े कुछ और ही तस्वीर पेश करते हैं। उन्होंने दावा किया कि केरल में गायों की संख्या में आठ प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 15 प्रतिशत तथा झारखंड में 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि गायों की संख्या घटने वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है।

शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश सरकार को "कागजी शेर" बताते हुए कहा कि सरकारी गौशालाओं और केंद्रों में गायों की स्थिति दयनीय है तथा वहां लगातार गायों की मौत हो रही है।

एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए वह विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं ताकि मतदाताओं को जागरूक किया जा सके। उन्होंने कहा कि संत का पद राजा से ऊंचा होता है और योगी आदित्यनाथ ने संत होने के बावजूद मुख्यमंत्री पद स्वीकार कर अपने पद से नीचे का दायित्व ग्रहण किया। उन्होंने कहा कि अब वह मुख्यमंत्री हैं, संत और महंत नहीं।

आर्थिक मुद्दों पर टिप्पणी करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है और जल्द ही 100 के पार जा सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री की सोना खरीदने से बचने की अपील पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि इसकी जिम्मेदारी जनता पर नहीं डाली जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सबसे अधिक ईंधन बड़े विमानों में खर्च होता है और यदि बचत करनी है तो महंगे और अधिक ईंधन खपत वाले विमानों की जगह छोटे विमानों का उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म कार्य की शुरुआत अपने घर से होनी चाहिए। अपनी यात्रा में इस्तेमाल हो रही गाड़ी के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उनकी गाड़ी की कीमत करीब 30 लाख रुपये है, लेकिन वह धर्म का संदेश लेकर चल रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति पहले से ही धर्म में हस्तक्षेप कर रही है, जिसके कारण धार्मिक विषय भी राजनीतिक विवादों में घिर जाते हैं।

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