पटना , सितम्बर 23 -- बिहार में सम्राट मंत्रिमंडल ने प्रदेश में पशुपालकों की आय बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री गौधन विकास ऋण योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत पशुपालकों को बैंक ऋण के ब्याज पर शत-प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी और उन्हें केवल मूलधन चुकाना होगा। मंत्रिमंडल सचिवालय के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने बुधवार को मंत्रिपरिषद की बैठक में लिये गये निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि योजना के तहत ऋण की किश्तें पशुपालकों द्वारा दूध की बिक्री से स्वत: काटी जाएंगी, जबकि कॉम्फेड इसमें गारंटर की भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से तीन उन्नत नस्ल की गाय अथवा दो भैंस रखने वाले पशुपालकों को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि योजना का लाभ प्राप्त करने वालों में कम से कम 50 प्रतिशत महिला पशुपालकों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
श्री चौधरी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2028-29 तक तीन वर्षों के लिए मुख्यमंत्री गौधन विकास ऋण योजना के क्रियान्वयन पर कुल 160 करोड़ 10 हजार रुपये की अनुमानित लागत की स्वीकृति दी गयी है। सरकार का मानना है कि इससे पशुपालन को बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे और पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी।
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि कोसी क्षेत्र में डेयरी विकास को बढ़ावा देने के लिए सुपौल, मधेपुरा और सहरसा जिलों में 126 करोड़ सात लाख रुपये की लागत से आठ परियोजनाओं के क्रियान्वयन को भी मंजूरी दी गयी है। इनमें आधुनिक दही एवं प्रीमियम आइसक्रीम संयंत्र, टोटल मिक्स्ड राशन संयंत्र, सेक्स सॉर्टेड सीमेन, नयी दुग्ध सहकारी समितियों का गठन, मिल्क चिलिंग प्लांट और बीएमसीयू के लिए इंस्टेंट मिल्क चिलिंग सिस्टम शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा सेवाओं के विस्तार, सुदृढ़ीकरण और मानकीकरण के लिए बिहार पशु चिकित्सा अवसंरचना एवं सेवा सुदृढ़ीकरण नीति को सैद्धांतिक स्वीकृति दी गयी है। इसके तहत राज्य में पशु चिकित्सा सेवाओं का चार स्तरीय ढांचा विकसित किया जायेगा।
श्री चौधरी ने बताया कि सीवान के बसंतपुर, भगवानपुर हाट और गोरेयाकोठी प्रखंडों में एकीकृत मत्स्यपालन एवं जलीय कृषि विकास की योजना को भी मंजूरी दी गयी है। 2026-27 से 2028-29 के दौरान 195 करोड़ 28 लाख रुपये की लागत वाली इस योजना के तहत नये तालाब, आधुनिक हैचरी, बायोफ्लॉक एवं आरएएस इकाइयां, मत्स्य प्रसंस्करण संयंत्र, शीत श्रृंखला और प्रशिक्षण केंद्र सहित 28 घटक विकसित किये जायेंगे।
मंत्रिमंडल ने दूध, अंडा, मांस और ऊन उत्पादन के वैज्ञानिक आंकड़े जुटाने के लिए 81 पदों के सृजन को भी मंजूरी दी है। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में पांच करोड़ 21 लाख 73 हजार रुपये खर्च होंगे।
श्री चौधरी ने बताया कि पटना में माँ सीता महिला विश्वविद्यालय तथा बेगूसराय में रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दी गयी है। दोनों विश्वविद्यालयों की स्थापना के क्रम में पदाधिकारियों और कर्मियों के वेतनादि के लिए 15-15 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गयी है। उन्होंने कहा कि माँ सीता महिला विश्वविद्यालय का क्षेत्राधिकार पटना जिले के पटना विश्वविद्यालय के महाविद्यालयों को छोड़कर सभी अंगीभूत एवं संबद्ध महिला महाविद्यालयों तक होगा, जबकि दिनकर विश्वविद्यालय का क्षेत्राधिकार बेगूसराय एवं खगड़िया जिलों के संबंधित महाविद्यालयों तक होगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित