गौतमबुद्धनगर , अक्टूबर 21 -- उत्तर प्रदेश में जनपद गौतमबुद्धनगर में मतदाताओं की सुविधा और निर्वाचन व्यवस्था को अधिक सुगम बनाने के उद्देश्य से मतदान केंद्रों एवं मतदेय स्थलों के संभाजन और पुनर्गठन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। बुधवार को अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी अजीत कुमार सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई।
बैठक में उप जिला निर्वाचन अधिकारी अजीत कुमार सिंह ने बताया कि, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, के निर्देशानुसार मतदेय स्थलों का निर्धारण 1,200 मतदाताओं के आधार पर किया जाना है। इसके लिए जनपद के सभी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में मतदेय स्थलों का भौतिक सत्यापन, पुनर्निर्धारण और आवश्यकता के अनुसार नए मतदेय स्थल स्थापित करने की कार्रवाई की जा रही है।
नोएडा विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में 233 मतदान केंद्र और 811 मतदेय स्थल हैं। पुनर्गठन के बाद 232 मतदान केंद्र और 784 मतदेय स्थल प्रस्तावित किए गए हैं। दादरी विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान के 303 मतदान केंद्र और 794 मतदेय स्थलों के मुकाबले 327 मतदान केंद्र और 746 मतदेय स्थल प्रस्तावित हैं। वहीं, जेवर विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में 207 मतदान केंद्र और 419 मतदेय स्थल हैं, जिन्हें पुनर्गठन के बाद क्रमशः 204 और 395 किए जाने का प्रस्ताव है।
इस प्रकार जनपद में वर्तमान के कुल 743 मतदान केंद्र और 2,024 मतदेय स्थलों के स्थान पर पुनर्गठन के बाद 763 मतदान केंद्र और 1,925 मतदेय स्थल प्रस्तावित हैं। यानी मतदान केंद्रों की संख्या में 20 की वृद्धि, जबकि मतदेय स्थलों की संख्या में 99 की कमी प्रस्तावित है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 16 से 18 अक्टूबर तक मतदेय स्थलों का भौतिक सत्यापन और पुनर्निर्धारण किया गया। इसके बाद 19 अक्टूबर को आपत्तियों एवं सुझावों के लिए आलेख्य सूची प्रकाशित कर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई गई। प्राप्त आपत्तियों और सुझावों का निस्तारण करने के बाद 26 अक्टूबर को अंतिम सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद 27 अक्टूबर को सभी आवश्यक संलग्नकों सहित प्रस्ताव अनुमोदन के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को भेजा जाएगा।
अपर जिलाधिकारी ने सभी संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को निर्देश दिए कि मतदाता सूची का शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन करने के बाद ही मतदेय स्थलों का संभाजन किया जाए। शहरी क्षेत्रों में बहुमंजिला भवनों, ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी और नई विकसित कॉलोनियों में मतदाताओं की संख्या एवं सुविधा के अनुसार व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। पुराने और जर्जर भवनों के स्थान पर उपयुक्त स्थायी भवनों का चयन करने तथा दिव्यांग एवं अशक्त मतदाताओं के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
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