बैतूल , अगस्त 01 -- मध्य प्रदेश में बैतूल जिले के ग्राम गोधना स्थित गोंडवाना कालीन ऐतिहासिक किला और मां चंडी देवी मंदिर एक बार फिर विवादों में है। ग्रामीणों ने मंदिर परिसर और ऐतिहासिक धरोहर क्षेत्र में कथित अतिक्रमण, धार्मिक स्थल की मूल संरचना से छेड़छाड़ तथा प्राचीन नीम के पेड़ को काटे जाने के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पूरे परिसर को संरक्षित स्मारक घोषित करने की प्रक्रिया तेज करने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि गोधना में स्थित लगभग 500 वर्ष पुराना राजा ईल का ऐतिहासिक किला और मां चंडी देवी मंदिर क्षेत्र की महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर हैं। उनका आरोप है कि संरक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ने से पहले ही मंदिर परिसर की भूमि पर अतिक्रमण के प्रयास शुरू हो गए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हरि यादव द्वारा मंदिर परिसर की भूमि पर हस्तक्षेप किया जा रहा है तथा प्रशासन की मौजूदगी में धार्मिक स्थल की मूल संरचना से भी छेड़छाड़ की गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

ग्रामीणों का यह भी दावा है कि मंदिर परिसर में वर्षों से आस्था का केंद्र रहे प्राचीन नीम के पेड़ को काट दिया गया, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है। उनके अनुसार यह वृक्ष मां चंडी देवी की पूजा परंपरा का अभिन्न हिस्सा था और श्रद्धालु इसे देवी स्वरूप मानकर पूजा-अर्चना करते थे। उनका कहना है कि वृक्ष काटे जाने से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

इस बीच ग्रामीणों ने मंदिर परिसर में स्थित अन्य पूजा स्थलों के साथ भी छेड़छाड़ किए जाने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि ऐतिहासिक धरोहर या धार्मिक स्थल के साथ अवैध हस्तक्षेप अथवा अतिक्रमण हुआ हो तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

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