डिंडौरी , जून 05 -- मध्यप्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा है कि गोंड चित्रकला जनजातीय समाज की प्राचीन और गौरवशाली कला है, जिसे डिजिटल विपणन मंचों के माध्यम से वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार डिंडौरी जिला मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री श्री पटेल ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से 'ई-कारीगर' मंच के शुभारंभ और समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री राधा सिंह सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
मंत्री श्री पटेल ने कहा कि गोंडी कला आधारित उत्पादों को विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डिजिटल व्यापार मंचों पर उपलब्ध कराने से कलाकारों को व्यापक बाजार मिलेगा। इससे उन्हें उनकी कला का उचित मूल्य और सम्मान प्राप्त होगा तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बनेगी। उन्होंने गोंड चित्रकला को भौगोलिक संकेतक (जीआई) मान्यता दिलाने के लिए भी प्रयास करने की बात कही।
कार्यक्रम में पाटनगढ़ के 'आजीविका ग्राम संगठन' और 'डॉट्स एंड डैशेज' संस्था के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। पाटनगढ़ के 157 परिवार प्रत्यक्ष रूप से गोंड चित्रकला से जुड़े हैं, जिनमें 85 महिला और 72 पुरुष कलाकार शामिल हैं।
इस साझेदारी का उद्देश्य पारंपरिक गोंड चित्रकला का संरक्षण, संवर्धन तथा बाजार का विस्तार करना है। अधिकारियों के अनुसार व्यवस्थित विपणन सहयोग से चित्रकार परिवारों की औसत वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और डिजिटल माध्यमों से बिक्री बढ़ने पर आगामी वर्षों में आय में और वृद्धि की संभावना है।
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