अहमदाबाद , फरवरी 20 -- राजस्थान में गैस गीजर विस्फोट में 86 प्रतिशत झुलसे 10 वर्षीय मरीज का गुजरात के स्टर्लिग होस्पिटल्स, अहमदाबाद में सफल उपचार हुआ जिससे उसे नया जीवन मिला है।

स्टर्लिंग हॉस्पिटल्स के कंसल्टेंट, प्लास्टिक सर्जन डॉ. विजय भाटिया ने शुक्रवार को यहां बताया कि राजस्थान में 18 जनवरी 2026 को गैस गीजर विस्फोट में वहीं के निवासी 10 वर्षीय मरीज और उसके पिता गंभीर रूप से झुलस गए थे। दोनों को राजस्थान के स्थानिय होस्पिटल में प्राथमिक उपचार के बाद स्टर्लिंग हॉस्पिटल्स, अहमदाबाद यूनिट में स्थानांतरित किया गया, जहां उन्होंने और मेडिकल टीम ने तुरंत उपचार शुरू कर मरीज की जान बचा ली। दस वर्षीय मरीज 86 प्रतिशत तक झुलस गया था जबकि उसके पिता भी लगभग 35 प्रतिशत तक झुलस गए थे, जिनका उपचार भी सफलतापूर्वक किया गया।

डॉ. विजय भाटिया ने बताया कि इतनी कम उम्र में 86 प्रतिशत से अधिक जलने की चोट (बर्न ईन्जरी) से झुलसे मरीज की जीवित रहने की संभावना केवल लगभग 15 प्रतिशत होती है। लेकिन समय पर और उचित उपचार मिलने से रिकवरी की संभावना बढ़ जाती है। अन्य अस्पताल में प्रारंभिक आकलन में पेशेंट के जलने की मात्रा लगभग 90 प्रतिशत बताई गई थी, जबकि स्टर्लिंग हॉस्पिटल्स में विस्तृत जांच के बाद लगभग 86 प्रतिशत प्रमुख रूप से सेकंड डिग्री जलने (बर्न) की पुष्टि हुई।

शुरुआती चरण में ही कोलेजन आधारित बायोलॉजिकल ड्रेसिंग शुरू करना जीवन बचाने में निर्णायक साबित हुआ। उपचार के दौरान सभी महत्वपूर्ण वाइटल पैरामीटर्स की निरंतर निगरानी कर उन्हें सामान्य सीमा में बनाए रखा गया, जो प्लास्टिक सर्जरी, इंटेंसिव केयर, एनेस्थीसिया और नर्सिंग टीम के मजबूत समन्वय को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर थी और कम उम्र होने के कारण उपचार की योजना विशेष सावधानी से बनाई गई। जांच के बाद यह सेकंड डिग्री बर्न केस पाया गया, जिसमें बायोलॉजिकल स्किन कवर से उपचार अधिक लाभकारी साबित हुआ।

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