जयपुर , मार्च 19 -- राजस्थान में एलपीजी गैस सिलेंडर की बढ़ती मांग और संभावित कमी का फायदा उठाकर साइबर ठगों ने आमजन की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ करना शुरू कर दिया है।
पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने इस संबंध में एक विशेष एडवाइजरी जारी कर प्रदेशवासियों को सतर्क रहने की अपील की है।
पुलिस उपमहानिरीक्षक (साइबर क्राइम) शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी मनोवैज्ञानिक दबाव और तकनीकी हेरफेर के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। पुलिस ने मुख्य रूप से पांच तरीकों की पहचान की है, जिसमें ठग विभिन्न गैस कंपनियां की फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों को ऑनलाइन बुकिंग का झांसा देते हैं और उनकी बैंकिंग डिटेल्स चुरा लेते हैं। अपराधी खुद को गैस एजेंसी का कर्मचारी बताकर कॉल करते हैं। वे केवाईसी अपडेट न होने पर कनेक्शन कटने या सब्सिडी रुकने का डर दिखाकर ओटीपी और यूपीआई पिन मांग लेते हैं। सब्सिडी होल्ड पर है, तुरंत अपडेट करें जैसे मैसेज भेजकर फिशिंग लिंक्स पर क्लिक कराया जाता है, जिससे मोबाइल का डेटा हैक हो जाता है। मदद के नाम पर अपराधी एनी डेस्क या टीम व्यूवर जैसे ऐप डाउनलोड करवाते हैं, जिससे फोन का पूरा कंट्रोल ठगों के पास चला जाता है तथा क्यूआर कोड स्कैन कराया जाता है। याद रखना चाहिए कि पैसे प्राप्त करने के लिए कभी क्यूआर कोड या पिन की जरूरत नहीं होती।
पुलिस ने साइबर क्राइम शाखा ने ठगी से बचने के लिए आमजन को सावधानियां बरतने एवं सतर्क रहने की अपील की है। जिसमें आधिकारिक प्लेटफॉर्म ही चुनें, हमेशा कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट, आधिकारिक ऐप या रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से आईवीआरएस का ही उपयोग करें, जल्दबाजी में निर्णय न लें: यदि कोई आपको तुरंत कार्रवाई के लिए डराता है, तो समझ जाएं कि वह ठग हो सकता है। अपराधी आपको सोचने का समय नहीं देना चाहते। बैंक डिटेल्स, आधार नंबर या ओटीपी किसी को न दें। कोई भी असली गैस कंपनी फोन पर आपसे यह जानकारी नहीं मांगती। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने फोन में कंट्रोल देने वाले ऐप्स कभी इंस्टॉल न करें। गूगल पे या फोन पे जैसे ऐप्स पर भुगतान करते समय नाम और विवरण को दो बार चेक करें। साइबर ठगी का शिकार होने पर घबराएं नहीं और तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर पुलिस स्टेशन पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
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