भोपाल , मार्च 29 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार पर गेहूं उत्पादक किसानों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार खरीदी टालने के बहाने तलाश रही है।

माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने बयान जारी कर कहा कि सरकार पहले ही किसानों के बोनस में 135 रुपये की कटौती कर उन्हें आहत कर चुकी है और अब गेहूं खरीदी स्थगित करने की तैयारी कर किसानों के जख्मों पर नमक छिड़क रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बारदाने की कमी का बहाना बनाकर सरकार गेहूं खरीदी की तारीख आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है, जबकि इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभागों में एक अप्रैल से खरीदी शुरू होना थी और सात अप्रैल से पूरे प्रदेश में खरीदी की घोषणा पहले ही की जा चुकी है।

माकपा नेता के अनुसार प्रदेश में गेहूं खरीदी के लिए करीब 15.60 करोड़ बोरों की आवश्यकता है, जबकि अभी तक केवल 5.50 करोड़ बोरों की ही व्यवस्था हो पाई है, जिससे कुल उत्पादन का केवल एक चौथाई ही खरीदा जा सकेगा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार बड़े किसानों का गेहूं न खरीदने पर विचार कर रही है, जिससे छोटे और गरीब किसानों को औने-पौने दामों पर बिचौलियों को फसल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। माकपा ने मांग की है कि सरकार तत्काल पर्याप्त बारदाने की व्यवस्था कर निर्धारित समय पर गेहूं की खरीदी शुरू करे और पूरी फसल की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद सुनिश्चित करे।

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