बैतूल , अक्टूबर 6 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में इस साल मानसून की बेरुखी और अल्प वर्षा के कारण जल संकट गहराने लगा है। जिले में सामान्य से मात्र 66 फीसदी ही बारिश दर्ज की गई है, जिसके चलते नदी-नालों का जलस्तर काफी कम है। प्रशासनिक उदासीनता के कारण स्टॉप डैमों के गेट तक बंद नहीं कराए गए हैं, जिससे बहुमूल्य पानी व्यर्थ बह रहा है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले की सामान्य औसत बारिश 43.35 इंच है, लेकिन इस बार मात्र 28.87 इंच औसत बारिश ही रिकॉर्ड की गई। बाढ़ जैसी स्थिति कहीं नहीं बनी और जो थोड़ी-बहुत बारिश हुई, उसे संरक्षित करने में विभाग पूरी तरह लापरवाह रहा।

बीते वर्षों में विधायक-सांसद निधि और खनिज मद से लाखों रुपये खर्च कर भीमपुर, भैंसदेही, चिचोली, बैतूल, आठनेर, शाहपुर, घोड़ाडोगरी, आमला, मुलताई और प्रभातपट्टन सहित विभिन्न विकास खंडों में स्टॉप डैम बनाए गए थे। लेकिन कई जगहों पर गेट या शटर गायब हो चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ स्थानों पर शटर की प्लेटें अन्य निर्माण कार्यों में उपयोग हो रही हैं, तो कहीं इनकी चोरी हो गई है। देखरेख के अभाव में ये डैम महज शोपीस बनकर रह गए हैं।

प्रशासन की सुस्ती के बीच ग्रामीण खुद आगे आए हैं। उन्होंने श्रमदान कर नदी में बोरी बंधान किया है, जिससे पानी रुकने लगा है। यह आगामी रबी सीजन में किसानों और ग्रामीणों के लिए वरदान साबित होगा। जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते सभी स्टॉप डैमों में पानी नहीं रोका गया, तो आने वाले दिनों में पेयजल संकट गंभीर रूप ले सकता है।

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