नयी दिल्ली , अगस्त 31 -- वर्तमान और भविष्य की खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए खेती के मौजूदा ढंग में खासे बदलाव लाने की जरूरत है। गूगल डीपमाइंड से बने दो एआई मॉडल इस प्रयास में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
ये दोनों 'एग्रीकल्चरल लैंडस्केप अंडरस्टैंडिंग' (एएलयू) और 'एग्रीकल्चरल मॉनिटरिंग एंड इवेंट डिटेक्शन' (एएमईडी) उपग्रह से मिले फोटो के इस्तेमाल से खेतों की सीमाओं का मानचित्रण करते हैं और कृषि गतिविधियों पर नज़र रखते हैं।
खासतौर पर भारत की खेती के तरीके में मदद के लिए बने इन मॉडलों के परिणामों को एशिया-प्रशांत और अफ्रीका के 11 देशों में विशेषज्ञों के साथ साझा किया गया है। इन मॉडलों के आउटपुट एपीआई के रूप में और गूगल अर्थ पर मुफ़्त उपलब्ध कराए गए हैं। एएलयू डेटा लेयर विश्व स्तर पर गूगल अर्थ पर सबसे लोकप्रिय लेयर्स में से एक है।
दरअसल वैश्विक कृषि-खाद्य क्षेत्र लगातार गंभीर दबाव में बना हुआ है। एक अनुमान के अनुसार 2025 में विश्व की वर्तमान जनसंख्या के 25 फीसदी से अधिक लोग खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे थे, इसके लिए हमें वैश्विक खाद्य उत्पादन में 50 फीसदी तक की वृद्धि करना आवश्यक है। इन मॉडलों का लाभ उठाकर ऐसे समाधान तैयार हो रहे हैं जो भारतीय और वैश्विक कृषि क्षेत्र दोनों को मजबूत करते हैं। इनमें टिकाऊ खेती के तरीकों से लेकर किसानों की ऋण तक बेहतर पहुंच, मजबूत नीतिगत निर्णय और कुशल संसाधन प्रबंधन शामिल हैं।
इसे कुछ मिसालों से आसानी से समझा जा सकता है। कार्बनफार्म ने चावल की खेती के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने वाले कार्यक्रमों में खेत-स्तरीय सीमांकन को स्वचालित करने के लिए एएलयू एपीआई और जेमिनी का उपयोग किया है। यह 2030 तक 20 लाख हेक्टेयर में कम कार्बन वाली चावल की खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों का हिस्सा है।
एएलयू और एएमईडी एपीआई का उपयोग करते हुए, टेरास्टैक ने एक प्लेटफार्म बनाया है जिसने 14 करोड़ हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि का मानचित्रण किया है। इससे खेतों में भौतिक रूप से जाने की आवश्यकता कम हो गई है और खेती के मामले में तेजी से एवं अधिक सटीक निर्णय लेने में मदद मिल रही है।
तेलंगाना का एडेक्स प्लेटफॉर्म राज्य के 50 लाख से अधिक किसानों को लाभ पहुंचाने वाले नवाचारों के लिए एएलयू और एएमईडी का उपयोग कर रहा है। इसमें राज्य के 'कृषिवास' एप्लिकेशन का एक पायलट प्रोजेक्ट भी शामिल है। यह फसल, मौसम पैटर्न और स्थानीय कीटों के प्रकोप पर सटीक और अति-स्थानीय सलाह प्रदान करता है।
संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की नयी जिओ-एआई-फॉर-स्टैट्स पहल कृषि स्थिरता की निगरानी को मजबूत करने के लिए एएलयू और एएमईडी को अपने वैश्विक क्रॉपग्रिड्स डेटा भंडार में जोड़ रही रही है। इसके अलावा कर्नाटक के जल संसाधन विभाग ने सिंचाई को मजबूत करने के लिए एएलयू और एएमईडी को स्थानीय मौसम व रिमोट सेंसिंग डेटा के साथ एकीकृत किया है।
इन मॉडलों के उपयोग पर टिप्पणी करते हुए, गूगल डीपमाइंड के कृषि और सतत विकास अनुसंधान प्रमुख आलोक तालेकर ने कहा: "हमारी एंथ्रोकृषि टीम ऐसे लक्षित कृषि समाधानों का समर्थन करने के लिए समर्पित है जो उत्पादकता बढ़ाने और जलवायु प्रभाव को कम करने दोनों का काम करते हैं। भारत में विकसित हमारे एआई मॉडलों का किसान ऋण, फसल परामर्श और नीतिगत निर्णयों में बढ़ता उपयोग भारतीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर हमारे दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करता है। जैसे-जैसे ये मॉडल और अधिक देशों में विस्तारित होंगे, हम खाद्य सुरक्षा और कृषि लचीलेपन जैसी प्रमुख वैश्विक प्राथमिकताओं के लिए नई संभावनाओं की उम्मीद करते हैं।"जैसे-जैसे विभिन्न क्षेत्रों में इनका उपयोग बढ़ रहा है, गूगल और गूगल डीपमाइंड की एंथ्रोकृषि टीम डेटा-आधारित अंतर्दृष्टि प्रदान करने और अधिक उत्पादक, लचीले व टिकाऊ भविष्य का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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