बाबा बकाला साहिब/अमृतसर , सितंबर 24 -- श्री अकाल तख्त साहिब से शुरू हुआ मीरी-पीरी खालसा मार्च गुरुवार को अपने तीसरे चरण में बाबा बकाला साहिब से जयकारों की गूंज के बीच गुरुद्वारा जन्मस्थान बाबा बुड्ढा साहिब, कथूनंगल के लिए रवाना हुआ।
मार्च की रवानगी के अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह, सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब के ग्रंथी ज्ञानी परविंदरपाल सिंह, तरना दल बाबा बकाला साहिब के प्रमुख बाबा जोगा सिंह सहित प्रमुख हस्तियां और बड़ी संख्या में संगत मौजूद रही। धार्मिक दीवान में रागी जत्थों ने गुरबाणी कीर्तन किया और ज्ञानी परविंदरपाल सिंह ने कथा-विचार किया।
ज्ञानी गड़गज्ज ने कहा कि मीरी-पीरी खालसा मार्च का संदेश गुरु ग्रंथ साहिब की अगुवाई और श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता के प्रति समर्पित होकर पंथ को एकजुट रखना है। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय ने इतिहास में बड़ी कुर्बानियां दी हैं और उनसे गुरु के प्रति निष्ठा व विश्वास बनाये रखने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ी चिंता युवाओं को नशे से बचाने की है। इसके लिए युवाओं को गुरबाणी, गुरमत, सेवा और सिख जीवन से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को गुरुद्वारा साहिब, संगत और सेवा से जोड़ने तथा गुरबाणी से परिचित कराने का आह्वान किया।
अकाल तख्त के जत्थेदार ने कहा कि पंथ की संस्थाएं और संगठन सिखी की चढ़दी कला के लिए महत्वपूर्ण हैं और इन्हें कमजोर करने के बजाय अकाल तख्त की अगुवाई में एकजुट होकर काम करना चाहिए। उन्होंने संगत से अकाल तख्त की सर्वोच्चता को चुनौती देने वाली प्रवृत्तियों के प्रति सचेत रहने का आग्रह किया।
इस अवसर पर ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज और ज्ञानी टेक सिंह ने पांच प्यारों तथा निशानची सिंहों को सिरोपे भेंट कर सम्मानित किया। खालसा मार्च के विभिन्न पड़ावों पर संगत ने स्वागत किया और लंगर लगाये। विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों ने भी मार्च में भाग लिया। गुरु साहिबान के शस्त्रों के दर्शन के लिए भी संगत में उत्साह देखा गया।
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