कुरुक्षेत्र, एक नवंबर (वार्ता ) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को गुरुकुल कुरुक्षेत्र के 114वें स्थापना दिवस और स्वामी श्रद्धानंद की शहादत के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान, तपस्या और राष्ट्रसेवा को नमन किया। राष्ट्रपति ने कहा कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र जैसे संस्थान देश की प्राचीन ज्ञान परंपराओं, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ भावी पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार कर रहे हैं।

समारोह में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि किसी भी देश का भविष्य उसके युवाओं के संस्कारों, मूल्यों और क्षमताओं से निर्धारित होता है। स्वामी श्रद्धानंद ने शिक्षा को राष्ट्रीय जागरण का आधार बनाया और समाज में आत्मसम्मान, अनुशासन तथा सेवा की भावना विकसित करने के लिए अपना जीवन समर्पित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद ने महर्षि दयानंद सरस्वती से प्रेरित होकर ज्ञान, चरित्र और सेवा पर आधारित समाज निर्माण का मार्ग दिखाया। उन्होंने 1912 में स्थापित गुरुकुल कुरुक्षेत्र को उनकी दूरदर्शिता की जीवंत विरासत बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी जी की शहादत के 100 वर्ष पूरे होने पर समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा पहुंचाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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