गांधीनगर , फरवरी 22 -- गुजरात में सांप के डसने से होने वाली मौतों को कम करने के लिए राज्य सरकार के पास जल्द ही राज्य में पाए जाने वाले जहरीले सांपों से ही बना एंटीवेनम उपलब्ध होगा।

सूत्रों ने रविवार को बताया कि सर्पदंश से होने वाली मौतों को कम करने की दिशा में यह कदम काफी प्रभावी सिद्ध होगा।राज्य सरकार ने दक्षिण गुजरात के वलसाड जिले के धरमपुर शहर में सर्प अनुसंधान केंद्र (स्नेक रिसर्च इंस्टीट्यूट-एसआरआई) की स्थापना की है। इस संस्थान में गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों में पाए जाने वाले जहरीले सांपों को लाया जाता है। अभी इस संस्थान में लगभग 460 जहरीले सांपों को रखा गया है। सांपों की देखभाल और जहर निकालने की प्रक्रिया में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की गाइडलाइन का पालन किया जाता है। सांप से निकाले गए जगह को आधुनिक टेक्नोलॉजी के जरिए प्रोसेस कर पाउडर में बदला जाता है। इस पाउडर की नीलामी कर उसे लाइसेंस वाले एंटीवेनम बनाने वाले निर्माताओं को दिया जाएगा। गुजरात सरकार निर्माताओं द्वारा पाउडर से बनाए गए एंटीवेनम को खरीदेगी और राज्य के विभिन्न हॉस्पिटलों को सर्पदंश के उपचार के लिए एंटीवेनम की आपूर्ति करेगी।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य में सर्पदंश से होने वाली मौतों की रोकथाम के लिए गहन उपाय किए जा रहे हैं और इसके लिए गुजरात में पाए जाने वाले जहरीले सांपों से ही प्राप्त जहर से एंटीवेनम बनाने का अहम कार्य प्रगति पर है।

सर्प अनुसंधान केंद्र ने हाल ही में गुजरात में पाए जाने वाले चार प्रमुख जहरीले सांपों की प्रजातियों- इंडियन कोबरा, कॉमन क्रेट, रसेल्स वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर- के लायोफिलाइज्ड (पाउडर स्वरूप में) जहर की ई-नीलामी की। इस नीलामी में लाइसेंस वाले एंटीवेनम बनाने वाले निर्माताओं ने हिस्सा लिया। इस संस्थान में रखे और संभाले गए जहरीले सांपों से निकाले गए जहर की गुणवत्ता इतनी अच्छी थी कि इस जहर के लिए अनुमान से भी अधिक ऊंचे दाम मिले।

सर्प अनुसंधान केंद्र के एक उच्च अधिकारी ने इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए बताया, "इंडियन कोबरा के जहर के लिए प्रति ग्राम 40,000 रुपए का आधार मूल्य निर्धारित किया गया था, लेकिन हमें प्रति ग्राम 44,000 रुपए प्राप्त हुए। सॉ-स्केल्ड वाइपर के जहर के लिए प्रति ग्राम 50,000 रुपए के आधार मूल्य के मुकाबले हमें 56,500 रुपए मिले। दूसरी प्रजातियों के लिए भी बेहतर प्रतिक्रिया के साथ ऊंचे दाम मिले।"सर्प अनुसंधान केंद्र के उपाध्यक्ष डॉ. डी.सी. पटेल ने कहा, "सर्पदंश के उपचार में मुख्य चुनौती अलग-अलग क्षेत्र के हिसाब से सांप के जहर का बदल जाना है। कई बार दूर-सूदुर क्षेत्र से लाए गए जहर से बनाया गया एंटीवेनम कम प्रभावी सिद्ध होता है। इस समस्या के समाधान के लिए गुजरात सरकार ने सर्प अनुसंधान केंद्र की स्थापना की है और यहां गुजरात में पाए जाने वाले जहरीले सांप की प्रजातियों से जहर एकत्रित कर एंटीवेनम तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। हमें उम्मीद है कि गुजरात में पकड़े गए सांप के जहर से बने एंटीवेनम सर्पदंश के उपचार में और अधिक कारगर साबित होंगे।"डॉ. डी.सी. पटेल एक जनरल सर्जन हैं, और सर्पदंश के उपचार में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। वे धरमपुर में एक हॉस्पिटल चलाते हैं और सर्पदंश पीड़ितों का उपचार करते हैं। सर्पदंश के उपचार में उनकी सफलता की दर 98 फीसदी से अधिक है। उन्होंने पिछले 35 वर्षों के दौरान सांप के डसने के हर केस का दस्तावेजीकरण भी किया है।

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