गिरिडीह , अगस्त 16 -- झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के गिरिडीह जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने परिसदन भवन में रविवार को पत्रकारों से कहा कि जमीन झारखंड का, कोयला झारखंड का, पानी झारखंड का, बिजली झारखंड का, प्रदुषण झारखंड के लोग झेलेंगे, विस्थापन झारखंडियों का होगा और मालिक केन्द्र सरकार बनेगा?ये झारखंड के लोग होने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार खनिज संशोधन विधेयक वापस ले। नहीं तो इस विधेयक के खिलाफ जोरदार और आर पार का आन्दोलन होगा। उन्होंने कहा कि झारखंड आन्दोलन की धरती है।

इस काला कानून को केन्द्र सरकार थोपने का काम नहीं करे। झारखंड की जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी।

श्री सिंह ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन से राज्यों के खनिजयुक्त भूमि पर कर एवं उपकर लगाने के अधिकार को सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इसे झारखंड के वित्तीय एवं विधायी अधिकारों पर असर डालने वाला कदम बताया।

उन्होंने कहा कि इस विधेयक से मंईयां सम्मान योजना, सर्वजन पेंशन योजना, अबुआ आवास योजना, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित कई योजनाओं पर असर पड़ेगा। विदित हो कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को खनिजों पर सेस लगाने को लेकर एक अहम फैसला दिया था। जिसमें झारखंड की जनता की आजीविका, प्रदुषण, विस्थापन आदि मसले का ख्याल रखा गया था। केन्द्र सरकार अब झारखंड की जनता का ख्याल नहीं रखकर अपने मित्रों का ख्याल रखना चाहती है और उसको लाभ पहुंचाना चाहती है। हाल ही में छत्तीसगढ़, उड़िसा, बिहार में पुंजीपति मित्रों को वहां की जमीन सौंप दिया। एक पेड़ माँ के नाम का नारा देकर लाखों पेड़ पुंजीपतियों द्वारा कटवाया जा रहा है। वहाँ के स्थानीय लोग इसको लेकर अभी आन्दोलन करने को बाध्य हैं।

झामुमो नेताओं ने कहा कि खनन से प्रभावित क्षेत्रों के विकास और जनकल्याण के लिए खनिज राजस्व का उपयोग जरूरी है। पार्टी ने दावा किया कि जेएमबीएल सेस से राज्य को वर्ष 2026-27 में करीब Rs.13,215 करोड़ संभावित राजस्व मिल सकता है।

झामुमो ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित संशोधन विधेयक वापस लेने तथा राज्यों से पर्याप्त परामर्श के बाद ही कोई निर्णय लेने की मांग की। जिलाध्यक्ष ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर पार्टी जनता के बीच जाएगी और जरूरत पड़ने पर चरणबद्ध आन्दोलन किया जाएगा।

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