सहारनपुर/देवबंद , मई 21 -- दारुल उलूम देवबंद के सदर मुदर्रिस एवं जमीयत उलेमा-ए-हिंद के एक धड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने तथा गौवध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने संबंधी कानून बनाए जाने की मांग की है। देवबंद में गुरुवार को मौलाना मदनी ने कहा कि भारत का बहुसंख्यक समाज गाय को मां के समान मानता और उसकी पूजा करता है। उन्होंने कहा कि यदि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर उसके वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाता है तो इससे गाय को लेकर होने वाली भीड़ हिंसा (मॉब लिंचिंग) की घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि जमीयत और दारुल उलूम देवबंद पहले भी मुसलमानों से हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान करने की अपील करते रहे हैं। आगामी 28 मई को ईद-उल-अजहा के मद्देनजर भी दारुल उलूम ने मुसलमानों से गाय की कुर्बानी न करने की अपील की है।
दारुल उलूम का कहना है कि उत्तर प्रदेश में गौहत्या गैरकानूनी है और बीफ खाना अथवा गाय की कुर्बानी देना इस्लामी शरीयत के भी खिलाफ है। संस्था ने मुसलमानों से किसी भी प्रकार से हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचाने की अपील की है।
मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि गाय संरक्षण की मांग लंबे समय से साधु-संत भी उठाते रहे हैं और सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी लगातार गाय को "राष्ट्र माता" घोषित किए जाने की मांग उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि गाय को पशुओं की सामान्य श्रेणी से अलग दर्जा दिया जाना चाहिए।
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