कोटा , मई 12 -- राजस्थान में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने मंगलवार को कोटा में जेके लोन अस्पताल एवं एमबीएस अस्पताल का निरीक्षण कर मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सकीय व्यवस्थाओं तथा उपचार प्रणाली की समीक्षा की और कहा कि चिकित्सा सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जायेगी।
श्रीमती राठौड़ ने जेके लोन के लेबर रूम, पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड, पीडियाट्रिक वार्ड एवं पैथोलॉजी लैब का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने भर्ती मरीजों एवं उनके परिजनों से संवाद कर उपचार, साफ-सफाई, दवाइयों एवं अन्य सुविधाओं के संबंध में फीडबैक लिया। महिलाओं एवं मरीजों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं एवं उपचार सेवाओं को संतोषजनक बताया।
उन्होंने अस्पताल प्रशासन से मरीज-चिकित्सक अनुपात, उपलब्ध संसाधनों एवं चिकित्सकीय स्टाफ की जानकारी ली। इस पर जेके लोन अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सकीय स्टाफ एवं आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं तथा मरीजों को बेहतर उपचार सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।
उन्होंने प्रसूताओं एवं नवजात शिशुओं की नियमित स्क्रीनिंग पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी बीमारी अथवा जटिलता की प्रारंभिक अवस्था में पहचान होने से समय पर उपचार संभव हो पाता है, जिससे गंभीर परिस्थितियों को रोका जा सकता है। उन्होंने चिकित्सकों को निर्देशित किया कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाले मामलों की विशेष मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए तथा प्रसव पूर्व एवं प्रसव पश्चात देखभाल को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।
श्रीमती राठौड़ ने पीडियाट्रिक वार्ड का निरीक्षण कर वहां भर्ती बच्चों एवं उनके परिजनों से भी बातचीत की तथा उपचार व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में संवेदनशीलता, सतर्कता एवं त्वरित उपचार अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि बच्चों एवं प्रसूताओं की स्क्रीनिंग व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जाए ताकि बीमारियों की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान कर समय पर उपचार शुरू किया जा सके।
उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए कि किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जाए। उन्होंने किशोरों से संबंधित बीमारियों की जांच, परामर्श एवं उपचार के संसाधनों को विकसित करने पर बल देते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य केवल उपचार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समग्र स्वास्थ्य विकास सुनिश्चित करना भी होना चाहिए।
इस दौरान उन्होंने एमबीएस कॉलेज का निरीक्षण भी किया। वहां प्रशिक्षणरत नर्सिंग स्टाफ द्वारा मूलभूत चिकित्सकीय प्रक्रियाओं में दक्षता नहीं पाए जाने पर उन्होंने गंभीर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नर्सिंग स्टाफ चिकित्सा व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग है। उन्हें समुचित प्रशिक्षण प्रदान कर दक्ष बनाया जाए। उन्होंने संबंधित निजी नर्सिंग कॉलेज के विरुद्ध नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रशिक्षणरत नर्सिंग स्टाफ को वरिष्ठ चिकित्सकों की निगरानी में ही कार्य कराया जाए तथा पूर्ण दक्षता एवं व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होने के उपरांत ही उन्हें अनुभव अथवा प्रमाण पत्र जारी किए जाएं।
उन्होंने कोटा संभाग के चिकित्सा अधिकारियों की बैठक में कहा कि कोटा में प्रसूताओं की मृत्यु की घटना बेहद दुखद है। प्रदेश में कहीं भी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं हो, इसके लिए सभी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, अस्पताल अधीक्षक, यूनिट हैड एवं सभी जिलों के सीएमएचओ को अपने दायित्वों का और अधिक संवेदनशीलता के साथ निर्वहन करते हुए व्यवस्थाओं में सुधार लाना होगा।
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