पटना , अप्रैल 04 -- बिहार के जल संसाधन और संसदीय कार्य विभाग के मंत्री विजय चौधरी ने शनिवार को गांधी: सत्याग्रह और जनआंदोलन विषय पर कहा कि गांधी दर्शन की शुरुआत बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के स्थापना समारोह में उनके भाषण से हुई थी और अगले साल 1917 में चंपारण सत्याग्रह ने उनको महात्मा बना दिया।

श्री चौधरी ने आज लोकदर्शन न्यास की तरफ से आयोजित रामचंद्र खान स्मृति समारोह में मुख्य वक्ता की हैसियत से कहा कि गांधी के अंदर दुनिया के कई बड़े विद्वानों का सार था। दक्षिण अफ्रीका में जब उनको ट्रेन से नीचे फेंक गया, तभी सत्याग्रह का बीज जमीन पर आया और वही बीज पहले पौधा और बाद में बिहार के चंपारण आ कर वृक्ष बन गया। उन्होंने गांधी को चंपारण लाने में राजकुमार शुक्ल की भूमिका की चर्चा की और कहा कि एक हठी किसान ने गांधी को बिहार की धरती पर बुला कर इतिहास रच दिया।

श्री चौधरी ने पत्रकार पीर मुहम्मद को भी याद किया, जिन्होंने गांधी को बिहार लाने में श्री शुक्ल की मदद की थी।

इस विमर्श में भाग लेते हुए मुंबई से आये टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के कुलपति प्रो. बद्रीनारायण ने कहा कि गांधी को ऐसे समय मे याद किया जा रहा हैं, जब सत्य का स्वरूप बदल गया है। उन्होंने कहा कि यह विमर्श का विषय है कि गांधी की नजर से समाज को देखें या समाज की नजर से गांधी को। उन्होंने कहा कि नजर कोई भी हो गांधी आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि गांधी भारतीय राजनीति में एक सुखद संयोग थे, जिसके दूरगामी परिणाम हुए और आज गांधी सिर्फ नाम नही, एक परिवेश और जीवन मूल्य के प्रतिनिधि हैं।

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