दरभंगा , मई 19 -- रिष्ठ राजनीतिक चिंतक एवं महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय वाराणसी के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सतीश कुमार ने मंगलवार को कहा कि महात्मा गांधी अतीत का गौरव भर नहीं, बल्कि भविष्य के सभ्य, शांतिपूर्ण और मानवीय समाज की मजबूत आधारशिला है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान विभाग में "महात्मा गांधी अतीत ही नहीं, भविष्य भी" विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान को संबोधित करते हुए डॉक्टर सतीश कुमार ने कहा कि गांधीजी के विचारों में समग्रता और मानवीय संवेदना का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। सत्य, अहिंसा, नैतिकता और मानव कल्याण पर आधारित उनके सिद्धांत आज भी सामाजिक असमानता, पर्यावरण संकट और बढ़ती असहिष्णुता जैसी चुनौतियों के समाधान में मार्गदर्शक साबित हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि गांधीजी का स्वदेशी और ग्राम स्वराज का विचार आज आत्मनिर्भर भारत और स्थानीय विकास की अवधारणा में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। गांधीजी का मानना था कि विकास केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें नैतिक मूल्यों, सामाजिक संतुलन और मानवीय कल्याण का समावेश होना चाहिए।
डॉ. कुमार ने कहा कि गांधी जी केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व ही नहीं बल्कि ऐसी जीवन सोच है जो आने वाली पीढ़ियो को दिशा दे सकती है इसलिए गांधी जी अतीत ही नहीं बल्कि भविष्य भी हैं।
गांधी विचारों की प्रासंगिकता पर आयोजित विशेष व्याख्यान की अध्यक्षता राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार चौधरी ने की।
अध्यक्षीय संबोधन में विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार चौधरी ने कहा कि महात्मा गांधी केवल स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी राजनीतिक चिंतक, समाज सुधारक और मानवता के पुजारी थे। उन्होंने कहा कि गांधीजी ने सत्य, अहिंसा, करुणा और मानवता के जिन मूल्यों को अपनाया, वही आज विश्व शांति का सबसे बड़ा आधार बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व हिंसा, असहिष्णुता और संघर्षों से जूझ रहा है, ऐसे समय में गांधीवादी विचार पहले से अधिक प्रासंगिक हो उठे हैं।
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