नागपुर , अगस्त 19 -- गांधीवादी विचारक और महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने कहा है किगांधीवादी विचारों को दबाया नहीं जा सकता है।

उन्होंने कहा कि किसी को भी खुद को गांधीवादी कहने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि गांधीवादी विचारों का असली सार उन्हें अपने जीवन में उतारने में है।

श्री तुषार ने नागपुर में मीडिया से बात करते हुए राष्ट्रीय राजधानी में जंतर-मंतर पर जेन-जी के विरोध प्रदर्शन, देश की राजनीतिक स्थिति, संविधान और युवा पीढ़ी की भूमिका पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि गांधी की विचारधारा को कमजोर करने की कोशिशों के बावजूद जब भी लोगों को लगता है कि उनका अस्तित्व खतरे में है, वे गांधीवादी मूल्यों की ओर रुख करते हैं।

उन्होंने जेन-जी के विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि इन प्रदर्शनों में गांधीवादी सिद्धांतों की झलक मिलती है, भले ही प्रदर्शनकारियों ने खुलकर गांधी का नाम नहीं लिया। पुलिस लाठीचार्ज का सामना करने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने हाथ जोड़कर शांतिपूर्ण ढंग से प्रतिक्रिया दी जिससे हिंसा न अपनाने का उनका संकल्प दिखा।

उन्होंने शिक्षा से गांधी की शिक्षाओं को हटाने की कोशिशों की आलोचना करते हुए कहा कि उनके नाम को दबाने की कोशिशों से उनके विचारों के बारे में जिज्ञासा बढ़ सकती है।

उन्होंने संविधान और उसके तहत बनी संस्थाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई और चेतावनी दी कि संविधान केवल एक ऐसी किताब बनकर रह सकता है जिसका सिर्फ़ कवर बचा हो।

श्री तुषार ने कांग्रेस के बारे में कहा कि पार्टी इंदिरा गांधी के बाद पैदा हुए वैचारिक खालीपन को भरने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर कई लोग अपनी ही विचारधारा से अनजान हैं, जिससे भाजपा के राजनीतिक नैरेटिव का प्रभावी ढंग से मुकाबला करना मुश्किल हो जाता है।

उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय नेताओं के बीच आपसी गुटबाजी ने भी पार्टी को एकजुट रुख अपनाने से रोका है।

श्री तुषार ने आगे आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस जेन-जी के विरोध प्रदर्शनों के बाद युवाओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि युवा पीढ़ी को प्रभावित करने के लिए उनके पास "ब्रेनवॉशिंग" के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।

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