केंद्रपाड़ा , मार्च 10 -- ओडिशा के गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य में बड़ी संख्या में 'ओलिव रिडले' समुद्री कछुओं के शव पाए जाने पर पशु प्रेमियों ने गहरी चिंता व्यक्त की है।
गहिरमाथा को ओलिव रिडले कछुओं के सबसे बड़े प्रजनन स्थल के रूप में जाना जाता है और इस मौसम में सामान्यत: यह प्रजाति नेस्टिंग के लिए तट पर आती है, लेकिन तट पर बड़ी संख्या में उनके शवों के पाये जाने से चिंताएं गहरी हो गयी है। कछुओं की सामूहिक मृत्यु का कारण कथित तौर पर अवैध मछली पकड़ने की गतिविधियां हैं।
बताया जाता है कि मछुआरे मछली पकड़ने के लिए बड़े यंत्रीकृत ट्रॉलरों का प्रयोग करते हैं, जिनमें अनजाने ही ये कछुए फंस जाते हैं। अभयारण के हबलीखाती और अन्य तटों पर सैकड़ों की संख्या में पड़े कछुओं के शवों को आवारा कुत्ते और जंगली सूअर खाते हुए भी देखे गये।
वन्यजीव कार्यकर्ताओं का दावा है कि मृत कछुओं की वास्तविक संख्या वन विभाग द्वारा रिपोर्ट किए गए आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है। मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार मृत कछुओं को तुरंत दफनाया जाना चाहिए। हालांकि, कई शव तटों पर बिखरे हुए हैं, जिससे दुर्गंध फैल रही है।
गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य के रेंजर कपिलेंद्र प्रधान ने कहा कि हालांकि हबलीखाती अभयारण्य क्षेत्र के भीतर आता है, लेकिन प्रशासनिक रूप से यह राजनगर रेंज कार्यालय के अधीन है। उन्होंने कहा कि तट पर पड़े मृत कछुओं की सटीक संख्या गिनना मुश्किल है, लेकिन उनका दावा है कि उनके अधिकार क्षेत्र में वर्तमान नेस्टिंग सीजन के दौरान अब तक 100 से कम शव देखे गए हैं। उनके अनुसार यह संख्या पिछले साल के आंकड़े से कम है।
लुप्तप्राय ओलिव रिडले समुद्री कछुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (अनुसूची I) के तहत संरक्षित है। ये कछुए आमतौर पर लगभग 75 सेंटीमीटर लंबाई तक बढ़ते हैं और प्रशांत, अटलांटिक और हिंद महासागर के उष्णकटिबंधीय पानी में पाए जाते हैं।
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