जयपुर , अक्टूबर 10 -- राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का महिला पुलिसकर्मी के प्रति आचरण और कांग्रेस सांसद एवं जेएनयू प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल का बच्चियों के प्रति यौन शोषण की दोनों घटनाएं देश के लोकतंत्र को शर्मसार करने वाली बताते हुए कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इन दोनों मामलों पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया क्यों नहीं दे रहे हैं।।
श्री राठौड़ ने शनिवार को यहां मीडिया से बातचीत में श्री गहलोत द्वारा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की सलाह पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने को अनावश्यक करार देते हुए पलटवार किया। उन्होंने कहा कि श्री गहलोत की सार्वजनिक छवि रही है, ऐसे में उन्हें राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर अपनी पार्टी के नेताओं के आचरण पर भी स्पष्ट रूप से बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्री राहुल गांधी द्वारा महिला पुलिसकर्मी के साथ अभद्र व्यवहार पर भी श्री गहलोत को बोलना चाहिए। सार्वजनिक जीवन में मर्यादा और शालीनता का पालन प्रत्येक जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पद लोकतंत्र में महत्वपूर्ण और सम्माननीय है। इस पद पर आसीन व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि उसका व्यवहार भी पद की गरिमा के अनुरूप हो। श्री गहलोत को श्री राहुल गांधी को भी सार्वजनिक जीवन की मर्यादा बनाए रखने की सलाह देनी चाहिए।
श्री राठौड़ ने श्री बिमोल से जुड़े छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि अंक बढ़ाने के बदले छात्राओं से अस्मिता की मांग की, तो यह अत्यंत गंभीर मामला है। शिक्षण संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सर्वोपरि होनी चाहिए। ऐसे व्यक्ति को तो सख्त से सख्त सजा देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि ये दोनों घटनाएं देश के लोकतंत्र को शर्मसार करने वाली है, ऐसे में श्री गहलोत इन दोनों मामलों पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया क्यों नहीं दे रहे हैं जबकि लोकतांत्रिक संस्थाओं के सम्मान, महिलाओं की गरिमा और छात्राओं की सुरक्षा जैसे विषयों पर राजनीति से ऊपर उठकर गंभीरता दिखाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के अध्यक्ष के नाते श्री नवीन ने कांग्रेस नेताओं को निर्वाचन आयुक्त से मिलने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कभी 240 तो कभी 400 लोगों के साथ निर्वाचन आयुक्त से मिलने की बात करती है। निर्वाचन आयुक्त के समक्ष किसी भी विषय पर अपनी बात तथ्यों और तर्कों के आधार पर रखी जानी चाहिए। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी कांग्रेस नेताओं को यही सलाह दी थी। यह निर्वाचन आयुक्त की पैरवी करने का विषय नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के समक्ष अपनी बात रखने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने का मामला है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस वास्तविक शिकायत के समाधान के बजाय इस मुद्दे को लेकर भ्रम फैलाने और मीडिया में चर्चा बनाए रखने का प्रयास कर रही है। ऐसे में श्री गहलोत द्वारा इस सलाह पर प्रतिक्रिया देना उचित नहीं है।
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