जयपुर , मार्च 31 -- राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयानों पर पलटवार करते हुए मंगलवार को कहा कि इंतजार में व्यक्ति सूख जाता है, इसलिए उन्हें अब संतोष का मार्ग अपनाते हुए वानप्रस्थ और सन्यास की ओर बढ़ते हुए संतोष शास्त्र सीखना चाहिए।

श्री राठौड़ ने यहां अपने बयान में कहा कि श्री गहलोत को अब "इंतजार शास्त्र" छोड़ देना चाहिए। उनका राजनीतिक कार्यकाल पूर्ण हो चुका है और अब उन्हें नई पीढ़ी को आगे आने का अवसर देना चाहिए। गहलोत का समय बीत चुका है, लेकिन वे अभी भी उम्मीद के सहारे राजनीति में टिके रहने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा "इंतजार में व्यक्ति सूखता जाता है, इसलिए गहलोतजी को अब संतोष का मार्ग अपनाते हुए वानप्रस्थ और सन्यास की ओर बढ़ते हुए संतोष शास्त्र सीखना चाहिए।"उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि श्री गहलोत ने कांग्रेस पार्टी को लगातार पतन और गर्त में पहुंचाने का काम किया। जिन राज्यों में उन्हें जिम्मेदारी दी गई, वहां पार्टी की स्थिति और कमजोर हुई। यह स्पष्ट संकेत है कि उनका प्रभाव समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि श्री गहलोत का बार-बार दिल्ली की ओर रुख करना इस बात को दर्शाता है कि उनकी पार्टी में निर्णय स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि हाईकमान द्वारा लिए जाते हैं वहीं उनके विरोधी भी दिल्ली के चक्कर काट रहे हैं, ऐसे में उनकी परेशानियां बढ़ने की संभावना ज्यादा है।

उन्होंने परिवारवाद पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस में वंशवाद की राजनीति हावी है। नेहरू से इंदिरा, इंदिरा से राजीव, राजीव से सोनिया और फिर राहुल तक सत्ता का हस्तांतरण हुआ है। यह लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास योग्यता और जनसेवा का अनुभव है तो उसे आगे आना चाहिए लेकिन परिवारवाद के आधार पर दूसरों को रोककर आगे बढ़ना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

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