अगरतला , अगस्त 13 -- त्रिपुरा के पूर्व बिजली मंत्री और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता माणिक डे ने आरोप लगाया है कि बिजली खपत के मीटर गलत मीटर रीडिंग दिखाते हैं जिससे उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

माकपा नेता ने उपभोक्ताओं को मिल रहे अत्यधिक बिलों और सेवा से संबंधित समस्याओं का हवाला देते हुए कहा कि त्रिपुरा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी कॉरपोरेशन लिमिटेड इस संबंध में संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में पूरी तरह विफल रहा है। उन्होंने 2018 के बाद से बिजली सेवाओं, बिलिंग और स्मार्ट मीटरों से जुड़ी शिकायतों में हुई भारी वृद्धि के बारे में भी बताया। उन्होंने उपभोक्ताओं की चिंताओं का सही तरीके से समाधान न करने और सरकार के परस्पर विरोधी दावे करने के लिए राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर लगाने से कोई समस्या नहीं है, लेकिन वर्तमान में लगाए गए मीटर सही और संतोषजनक रीडिंग नहीं दे रहे हैं।

पूर्व बिजली मंत्री ने कहा कि स्मार्ट मीटर लगना कोई नयी बात नहीं है, क्योंकि वाममोर्चा सरकार के शासनकाल में भी बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने, नुकसान कम करने, विश्वसनीयता बढ़ाने और बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार के लिए कदम उठाए गए थे। लेकिन असली समस्या वर्तमान स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता और उनकी प्रामाणिकता को लेकर है। इन मीटरों को सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के एक सबसे पसंदीदा कंपनी ने सप्लाई किया गया है।

उन्होंने बताया कि वाममोर्चा शासन के दौरान विश्व बैंक और केंद्र सरकार के सहयोग से एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत 50,000 स्मार्ट मीटर लगाए गए और उस समय उपभोक्ताओं की ओर से कोई बड़ी शिकायत नहीं आई। लेकिन 2018 के बाद पूरे देश में स्मार्ट मीटरों को तेजी से बढ़ावा दिए जाने और मीटरों की आपूर्ति, स्थापना व रखरखाव में निजी एजेंसियों की भागीदारी बढ़ने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है। इसके चलते मीटरों की गड़बड़ियों और भारी-भरकम बिलों के लिए जवाबदेही तय करने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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