कानपुर , मार्च 16 -- गर्मी की दस्तक के साथ ही कानपुर जिला प्रशासन ने एक बार फिर भूजल दोहन पर अपनी नजर जमा दी हैं । मुख्य विकास अधिकारी एवं सदस्य सचिव जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद दीक्षा जैन ने सोमवार को बताया कि सभी औद्योगिक, वाणिज्यिक, अवसंरचनात्मक इकाइयों, आरओ प्लांट और सामूहिक भूजल उपभोक्ताओं को भूजल दोहन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) या पंजीकरण कराना अनिवार्य किया गया है।
उन्होने बताया कि उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबंधन और विनियमन) अधिनियम 2019 के तहत राज्य में भूमिगत जल के संरक्षण, नियंत्रण और सतत प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं। विशेष रूप से भूजल संकटग्रस्त ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भूजल संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत सभी औद्योगिक, वाणिज्यिक, अवसंरचनात्मक इकाइयों, आरओ प्लांट और सामूहिक भूजल उपभोक्ताओं को भूजल दोहन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) या पंजीकरण कराना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा भूगर्भ कूप निर्माण करने वाली सभी ड्रिलिंग संस्थाओं का पंजीकरण भी जरूरी है।
इस संबंध में होटल, लॉज, आवासीय कॉलोनियां, रिजॉर्ट, निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, व्यावसायिक परिसर, शॉपिंग मॉल, मैरिज होम, पेयजल प्लांट, स्लॉटर हाउस और वाहन धुलाई केंद्र सहित सभी मौजूदा और प्रस्तावित भूजल उपभोक्ताओं को नोटिस जारी कर सूचित किया गया है कि बिना पंजीकरण या एनओसी के भूजल दोहन करना दंडनीय अपराध है।
अधिनियम की धारा 39 के तहत बिना पंजीकरण या अनापत्ति प्रमाण पत्र के भूजल दोहन करते पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति, समूह या संस्था पर 2 लाख से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना, 6 माह से 1 वर्ष तक का कारावास या दोनों दंड लगाए जा सकते हैं।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि किसी फर्म या संस्था द्वारा एक माह के भीतर पंजीकरण या एनओसी के लिए आवेदन नहीं किया जाता और वह अवैध रूप से भूजल दोहन करते हुए पाई जाती है, तो उसके खिलाफ अधिनियम के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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