इटावा , मई 27 -- इटावा के आयुष विभाग के चिकित्सक डॉ. कमल कुमार कुशवाहा ने नौतपा और भीषण गर्मी के दौरान लोगों को पारंपरिक और प्राकृतिक पेय पदार्थों व खाद्य सामग्री के सेवन की सलाह दी है। उनका कहना है कि कच्ची अमिया, पतला सत्तू, आम का पना और बेल का शरबत शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ लू और डिहाइड्रेशन से बचाने में मददगार हो सकते हैं। डॉ. कुशवाहा के अनुसार नौतपा में तेज धूप, गर्म हवाएं और लगातार बढ़ता तापमान शरीर पर प्रतिकूल असर डालता है। इससे पानी की कमी, थकान, चक्कर, कमजोरी और पेट संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में आयुर्वेद हल्के, सुपाच्य और शरीर में जल संतुलन बनाए रखने वाले आहार पर जोर देता है।
उन्होंने बताया कि कच्ची अमिया को दाल और सब्जियों में मिलाकर खाने से शरीर को ठंडक मिलती है और लू का असर कम होता है। वहीं पतला सत्तू प्राकृतिक ऊर्जा पेय की तरह काम करता है। इसमें काला नमक, भुना जीरा, नींबू और पुदीना मिलाकर पीने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और अधिक पसीने से होने वाली कमजोरी में राहत मिलती है।
डॉ. कुशवाहा ने कहा कि कच्चे आम से बना आम का पना गर्मी और लू से बचाने में बेहद प्रभावी माना जाता है। यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है। इसी तरह बेल का शरबत शरीर को शीतलता प्रदान करने के साथ पाचन शक्ति को भी मजबूत करता है और पेट की गर्मी, कब्ज तथा जलन जैसी समस्याओं में लाभ पहुंचाता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि नौतपा के दौरान अधिक मसालेदार, तला-भुना और भारी भोजन कम करें तथा पर्याप्त मात्रा में पानी, छाछ, मौसमी फल और पारंपरिक पेयों का सेवन करें। उनके अनुसार प्राकृतिक पेय आधुनिक कोल्ड ड्रिंक की तुलना में अधिक स्वास्थ्यवर्धक होते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं।
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