श्रीगंगानगर , फरवरी 26 -- राजस्थान में उत्तर-पश्चिम रेलवे के बीकानेर मंडल में ट्रेनों में चाय-नाश्ता बिक्री के ठेके को लेकर मचा घमासान अब गरीब परिवारों की आजीविका के संकट में बदल चुका है।

सू्त्रों ने बताया कि ठेकेदार द्वारा प्रतिदिन 240 रुपये की जबरन वसूली से त्रस्त कई वेंडर्स ने गुरुवार को रेल विकास संघर्ष समिति के समक्ष अपना दर्द रखा और निविदा तुरंत निरस्त करने की मांग की। समिति ने इसे गंभीरता से लेते हुए आंदोलन की पूरी तैयारी शुरू कर दी है।

बीकानेर रेल मंडल के वाणिज्यिक विभाग द्वारा हाल ही में जारी इस निविदा प्रक्रिया में धांधली के आरोप लग रहे हैं। वेंडर्स का कहना है कि अधिकतर लोग गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से हैं, जिनकी एकमात्र आय का सहारा ट्रेन में चाय, समोसा, बिस्किट बेचना है। वे जो कमाते हैं, उसमें से 240 रुपये रोज ठेकेदार की 'वसूली' में चले जाते हैं। इससे न सिर्फ उनकी दैनिक कमाई घट रही है, बल्कि परिवारों के सामने रोटी-रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। वेंडर्स ने बताया कि इस बोझ के कारण वे अब इस काम को जारी रखना भी मुश्किल मान रहे हैं।

सूत्रों ने बताया कि आज सूरतगढ़ रेलवे स्टेशन पर वेंडर्स ने रेल विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष रामप्रताप खोरवाल को लिखित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से निविदा प्रक्रिया में अनियमितताओं और ठेकेदार की मनमानी का जिक्र किया गया है। समिति अध्यक्ष रामप्रताप खोरवाल ने वेंडर्स को पूरा भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं। समिति इस पर विचार-विमर्श करेगी और जल्द ही अगली रणनीति की घोषणा करेगी। अगर गरीब परिवारों के हितों की अनदेखी की गयी तो हम आंदोलनात्मक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।

उधर, यह विवाद केवल सूरतगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बीकानेर मंडल के वेंडर्स को प्रभावित कर रहा है। वेंडर्स का आरोप है कि निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और छोटे वेंडर्स को पूरी तरह नजरअंदाज करके बड़ा ठेकेदार हावी हो गया है। उन्होंने मांग की है कि रेलवे प्रशासन तुरंत हस्तक्षेप करके ठेका रद्द करे और नयी निविदा में गरीब वेंडर्स को सीधा लाभ पहुंचाने का प्रावधान करें।

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