गरियाबंद , जुलाई 11 -- छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में आदिवासी विकास विभाग के माध्यम से कराए गए निर्माण कार्यों और कार्मिक नियुक्तियों में सामने आई अनियमितताओं को लेकर जिला प्रशासन ने कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार स्कूल जतन योजना के तहत जिले में कुल 830 विद्यालयों के निर्माण एवं मरम्मत कार्य ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) को सौंपे गए थे, जिन्हें लगभग पूरा कर लिया गया। वहीं आदिवासी विकास विभाग को सौंपे गए 165 कार्यों में 50 से अधिक कार्य अब भी अधूरे हैं। इनमें 24 कार्य ऐसे हैं, जिनके लिए महासमुंद की मेसर्स सुनील कंस्ट्रक्शन, कोरबा के अजय कुमार राठौर तथा जयनारायण यादव की फर्मों को अग्रिम भुगतान किया गया था, लेकिन निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हुआ। इन एजेंसियों से लगभग 2.88 करोड़ रुपये की वसूली की जानी है।
विभाग ने छह जुलाई को नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं तथा भुगतान नहीं होने की स्थिति में एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी है।
जिला पंचायत की शिक्षा समिति के तत्कालीन अध्यक्ष संजय नेताम ने आरोप लगाया कि स्थानीय ठेकेदारों को दरकिनार कर बाहरी एजेंसियों को मोटे कमीशन के आधार पर कार्य दिए गए, जिसका खामियाजा अब स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
इसी प्रकार जिले के 116 विद्यालयों में शौचालय निर्माण के लिए लगभग एक करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण एजेंसी के रूप में दुर्ग की कंचन कंस्ट्रक्शन को कार्य सौंपते ही 61 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान कर दिया गया। करीब दस महीने बाद भी केवल 23 शौचालयों का निर्माण पूरा हो सका। इसके बाद अप्रैल में कलेक्टर ने शेष राशि में से 36 लाख रुपये की वसूली के लिए नोटिस जारी किया, लेकिन अब तक ठेका कंपनी ने भुगतान नहीं किया है।
जिला पंचायत निर्माण समिति के सभापति ने आरोप लगाया कि संबंधित ठेकेदार प्रभावशाली अधिकारियों के करीबी होने के कारण अब तक केवल नोटिस की औपचारिकता निभाई गई, जबकि प्रशासन चाहे तो कंपनी को ब्लैकलिस्ट भी कर सकता था।
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